उज्जैन , जून 19 -- खगोलीय घटना के तहत देश में प्रतिवर्ष 21 जून के बाद उत्तरी गोलार्ध में दिन धीरे-धीरे छोटे होने लगेंगे तथा 23 सितंबर को दिन-रात बराबर होंगे।
उज्जैन की शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि खगोलीय घटना के तहत पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमने (परिक्रमण) के कारण सूर्य हमें कर्क रेखा से मकर रेखा के बीच गति करता हुआ दृष्टिगोचर होता है। परिक्रमण पथ की स्थिति में इस वर्ष 21 जून को उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा पर लंबवत होगा। 21 जून को सूर्य की क्रांति 23 अंश 26 कला 15 विकाल उत्तरा होगी।
उन्होंने बताया कि उज्जैन कर्क रेखा के नजदीक स्थित है अतः 21 जून को स्थानीय समय 12 बजे भारतीय मानक समय 12:28. पर सूर्य कर्क रेखा पर लंबवत स्थिति होने के कारण परछाई कुछ समय के लिए शून्य हो जाएगी। इसे शून्य छाया दिवस कहते हैं। सायन गणना के अनुसार 21 जून को सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेगा।
उन्होंने बताया कि 21 जून को सूर्य अपनी अधिकतम उत्तरी स्थिति कर्क रेखा पर होने के कारण उत्तरी गोलार्ध में दिन सबसे बड़ा तथा रात्रि सबसे छोटी होती है। 21 जून को उज्जैन में सूर्योदय प्रात: पांच बजकर 42 मिनट पर तथा सूर्यास्त सायं सात बजकर 16 मिनट पर होगा। इस प्रकार दिन 13 घंटे 34 मिनट तथा रात्रि 10 घंटे 26 मिनट की होगी। 21 जून के बाद सूर्य की गति दक्षिण की ओर दृष्टिगोचर होगी इसे दक्षिणायन का प्रारंभ कहते हैं। 21 जून के बाद उत्तरी गोलार्ध में दिन धीरे-धीरे छोटे होने लगेंगे और 23 सितंबर को दिन रात बराबर होंगे।
उन्होंने बताया कि वेधशाला में इस खगोलीय घटना को दिखाने की व्यवस्था की गई है। धूप होने पर दोपहर 12 बजकर 28 मिनट पर आप शंकु की परछाई को कुछ समय के लिए शून्य होते प्रत्यक्ष देख सकते हैं।
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