नयी दिल्ली , मई 10 -- केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें अत्यंत गहरी हैं और इसे मजबूत बनाने में संविधान और न्यायपालिका का अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान है।
उन्होंने कहा कि विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच सुंदर संतुलन और मर्यादा भारतीय लोकतंत्र की ख़ूबसूरती हैश्री शाह ने रविवार को यहां सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो पुस्तकों का विमोचन किया। इस अवसर पर देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा, " देश के संविधान की 76 साल की यात्रा में हमने अपने लोकतंत्र की जड़ें काफी गहरी कर ली हैं। हमारी बहुदलीय लोकतांत्रिक संसदीय प्रणाली को हमने निश्चित रूप से मजबूत किया है और 1947 से लेकर आज तक इस देश में संसद और विधानसभाओं के जरिए जितने भी परिवर्तन हुए, वह स्वीकार किए गए।यह बताता है कि हमारे लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसमें हमारे संविधान, देश की जनता और हमारी न्यायपालिका का बहुत बड़ा योगदान है।"श्री शाह ने कहा कि देश की जनता को विश्वास है कि अगर उसके साथ कोई अन्याय हुआ, तो संविधान जाग रहा है। अगर उसके अधिकारों पर आघात होगा तो न्याय के द्वार खुले हैं और कहीं भी यदि कमजोर व्यक्ति की आवाज या कमजोर विचार को दबाया जाएगा तो न्यायालय में आवाज जरूर सुनी जाएगी। इन तीनों मूल चीजों के आधार पर ही हमारा लोकतंत्र मजबूत हुआ है और मोटे तौर पर देखें तो न्याय को लेकर आम आदमी की आशा ही समाज का संतुलन और राष्ट्र के चरित्र का महत्वपूर्ण प्रमाण है। उन्होंने कहा कि हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस व्यवस्था में भी जो छोटी मोटी कमियां हैं उन्हें न्यायपालिका और कार्यपालिका दोनों मिलकर सुधारने का काम करेंगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए 'कंक्रीट टाइम बाउंड रोड मैप' के साथ आगे आना पड़ेगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा," हमारे लोकतंत्र की सुंदरता यह है कि संविधान ने विभिन्न संस्थाएँ एक-दूसरे का विरोध करने के लिए नहीं, परंतु एक-दूसरे को संतुलित करने के लिए बनाए हैं। इस भावना को हमें सही अर्थ में समझना पड़ेगा। कार्यपालिका निर्णय लेती है। न्यायपालिका उन निर्णयों की संवैधानिक समीक्षा करती है। " उन्होंने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने संवाद, मर्यादा और संतुलन तीनों को बनाए रखने के लिए बहुत अच्छे तरीके से एक भावना के साथ संविधान को लिखा है। पिछले 76 साल में शायद ही किसी देश ने इन सभी मर्यादाओं को संभालते हुए देश को आगे बढ़ाया होगा। हम सबके लिए बहुत हर्ष का विषय है कि हमारे यहां मोटे तौर पर सारी मर्यादाएं बनी रही और हमने इन परंपराओं को आगे भी बढ़ाया।
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