नयी दिल्ली , अक्टूबर 17 -- दिल्ली गोल्फ क्लब में आयोजित 'डीपी वर्ल्ड इंडिया चैंपियनशिप' के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए, डीपी वर्ल्ड पीजीटीआई के प्रमुखों ने कहा कि भारत में अगले दशक में विश्व-स्तरीय गोल्फर तैयार करने की क्षमता है। इसके पीछे मुख्य कारण भारत की युवा आबादी, खेल तक बेहतर पहुंच, मजबूत जमीनी बुनियादी ढांचा और भारतीय खिलाड़ियों को मिलने वाला अधिक अंतरराष्ट्रीय अनुभव है।
डीपी वर्ल्ड पीजीटीआई के बोर्ड सदस्य और भारत सरकार के पूर्व जी 20 शेरपा व नीति आयोग के पूर्व सीईओ, अमिताभ कांत; एनसीएलटी के सदस्य और भारत सरकार के पूर्व सचिव, अतुल चतुर्वेदी तथा डीपी वर्ल्ड पीजीटीआई के सीईओ, अमनदीप जोहल ने भारत में गोल्फ के विस्तार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश की मजबूत उपस्थिति और भारत को गोल्फ पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित करने के अवसरों पर प्रकाश डाला।
भारत की क्रिकेट यात्रा का उदाहरण देते हुए, डीपी वर्ल्ड पीजीटीआई के बोर्ड सदस्य अमिताभ कांत ने कहा, "भारत ने विश्व क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है, और अब हम गोल्फ में भी कुछ ऐसी ही यात्रा शुरू कर रहे हैं। देश में गोल्फ एक रोमांचक दौर में प्रवेश कर रहा है। यह एक दुर्लभ अवसर है। दुनिया के कुछ बेहतरीन गोल्फरों को देखने के लिए आने वाली भीड़, भारत के युवाओं को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। हमारी जनसांख्यिकीय स्थिति हमारे पक्ष में है, और मुझे विश्वास है कि आने वाले दशक में भारत ऐसे गोल्फर तैयार कर सकता है जो विश्व मंच पर प्रतिस्पर्धा करेंगे और जीत हासिल करेंगे।"खेल को और अधिक सुलभ बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, अमिताभ कांत ने कहा, "गोल्फ को अक्सर अमीरों का खेल माना जाता रहा है, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से हमारे कुछ बेहतरीन गोल्फर सामने आ सकते हैं।"उन्होंने छत्तीसगढ़ और झारखंड से मिल रही अच्छी प्रतिक्रिया का जिक्र किया और गोल्फ को बढ़ावा देने तथा युवा खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं विकसित करने की छत्तीसगढ़ सरकार की कोशिशों का उदाहरण दिया। उन्होंने आगे कहा, "अगर आदिवासी समुदायों के युवा लड़के-लड़कियों को ऐसे मौके मिलें, तो कोई वजह नहीं है कि वे बेहतरीन गोल्फर न बन सकें। अगले 10 सालों में, हम चाहते हैं कि पूरे भारत में यह खेल फले-फूले और हमारे खिलाड़ी वैश्विक टूर्नामेंट जीतें।"अमिताभ कांत ने बड़ी कंपनियों से अपील की कि वे गोल्फ को बढ़ावा देने के मामले में 'डीपी वर्ल्ड' की राह पर चलें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी में 25 प्रतिशत दाखिले खेल-कूद की योग्यता (स्पोर्टिंग मेरिट) के आधार पर होने चाहिए। इसके लिए राज्य स्तर पर प्रतिनिधित्व जैसे स्पष्ट मानदंड तय किए जा सकते हैं, ताकि खिलाड़ी अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए खेलों में भी हिस्सा ले सकें।
भारत में अंतरराष्ट्रीय गोल्फ पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता पर जोर देते हुए, एनसीएलटी के सदस्य और भारत सरकार के पूर्व सचिव, अतुल चतुर्वेदी ने कहा, "मेरा मानना है कि भारत में बेहतरीन गोल्फ कोर्स और जरूरी बुनियादी ढांचा मौजूद है। हमें बस इसकी बेहतर ब्रांडिंग करने की जरूरत है। गोल्फ डेस्टिनेशन के तौर पर भारत एक शानदार विकल्प है-चाहे बात गोल्फ कोर्स की हो या खेलने के खर्च की। जिस तरह भारत 'हेल्थ टूरिज्म' (स्वास्थ्य पर्यटन) के लिए एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, उसी तरह यहाँ 'गोल्फ टूरिज्म' को विकसित करने का भी अच्छा मौका है।"अमनदीप जोहल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया। इनमें सनशाइन, कोरियन, थाई और जापानी टूर के खिलाड़ियों को आमंत्रित करना, एशियन टूर और होटलप्लानर टूर के साथ मिलकर और अधिक टूर्नामेंट आयोजित करना, तथा भारतीय खिलाड़ियों को विदेशों में होने वाले 'क्वालीफाइंग स्कूलों' (टूर्नामेंट में जगह बनाने के लिए होने वाली प्रतियोगिताएं) में हिस्सा लेने के लिए आर्थिक मदद देना शामिल है।
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