नयी दिल्ली , अक्टूबर 21 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि खेती और सौर ऊर्जा का संगम किसानों की आर्थिक समृद्धि का नया रास्ता बना रहा है इसलिए सौर ऊर्जा संबंधी एग्रीवोल्टाइक नीति ऐसी होनी चाहिए जो देश के 85 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों के खेतों पर व्यावहारिक रूप से खरी उतरे।
श्री चौहान ने यहां आयोजित तीन दिवसीय '7वें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस' के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि एग्रीवोल्टाइक तकनीक से एक ही जमीन पर ऊपर सौर पैनल से बिजली पैदा होगी और नीचे फसल लहलहाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश का किसान अब केवल "अन्नदाता" ही नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा को अपनाकर वास्तविक अर्थों में "अन्नदाता भी और ऊर्जादाता भी" बनने जा रहा है।
श्री चौहान ने कहा कि देश में औसत भूमि जोत मात्र 0.96 हेक्टेयर है और 85 प्रतिशत से अधिक किसान छोटे व सीमांत हैं, इसलिए मॉडल ऐसा होना चाहिए जो छोटे किसान के खेत में कामयाब हो और पैदावार न रुके। उन्होंने कहा कि केवल सोलर पैनल के नीचे कुछ पौधे लगा देने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि पैनल की ऊंचाई, खंभों के बीच की दूरी और जुताई की व्यवस्था ऐसी रखनी होगी ताकि किसान हर साल अपनी पसंद से फसल और फसल-चक्र बदल सके।
उन्होंने बिजली खरीद, ग्रिड तक पहुंच और किसानों को समय पर भुगतान की व्यवस्था करने की बात करते हुए सुझाव दिया कि किसान उत्पादक संगठनों को इसमें सक्रिय रूप से जोड़ा जाए और उपकरणों के संचालन, मरम्मत व रखरखाव का प्रशिक्षण स्थानीय ग्रामीण युवाओं व महिलाओं को दिया जाए ताकि गांवों में ही रोजगार के बड़े अवसर तैयार हों। उन्होंने यह भी कहा कि कोई कंपनी परियोजना बीच में छोड़ दे या अनुबंध समाप्त होने पर पैनल हटाने पड़ें, तो उसका कोई भी बोझ किसान पर न आए।
इस मौके पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 'टेरी' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 11.6 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि में से 4.75 करोड़ हेक्टेयर भूमि (लगभग 30 प्रतिशत) एग्रीवोल्टाइक के लिए पूरी तरह उपयुक्त है, जिसमें महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि अगर इस जमीन के मात्र 10 प्रतिशत हिस्से पर भी एग्रीवोल्टाइक लगा दें, तो देश 2050 तक अनुमानित बिजली मांग को अकेले इसी से पूरा कर सकता है और इससे फसलों की पैदावार में भी 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
श्री जोशी ने बताया कि पीएम कुसुम योजना के तहत अब तक 30 लाख कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है, जिससे किसानों को रात के जोखिम भरे समय में सिंचाई से मुक्ति मिली है और दिन में निर्बाध बिजली मिल रही है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि सरकार जल्द ही पीएम कुसुम के अगले चरण के तहत दुनिया का सबसे महत्वाकांक्षी एग्रीवोल्टाइक कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। उन्होंने कहा कि अध्ययनों के अनुसार इससे लगभग 3.32 लाख रोजगार पैदा होंगे, जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार की तलाश में जिला मुख्यालयों या बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
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