ऑकलैंड , जुलाई 11 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के पास बहुत कुछ ऐसा है जो दोनों को एक-दूसरे का पूरक बनाता है और दोनों देश मिलकर एक वैश्विक ताकत बन सकते हैं।

तीन देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड की यात्रा पर आये श्री मोदी ने यहां एक बिजनेस कार्यक्रम में दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत का मध्यम वर्ग, बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण और अवसंरचना विकास की तेजी गति देश की विकास गाथा को अनोखा बनाती है। उन्होंने कहा, " और मैं चाहता हूं की भारत और न्यूजीलैंड मिलकर एक नयी शक्ति के रूप में उभरें।"प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में भारत में नीतिगत और राजनीतिक स्थिरता है। भारत एक बाजार मात्र नहीं है, भारत वैश्विक विकास का इंजन है।

उन्होंने दोनों देशों को मिलकर अपने संबंधों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने की सलाह दी। न्यूजीलैंड के कारोबारियों से भारत के साथ मिलकर काम करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, "आइये, हम हमारी साझेदारी को समृद्धि का आधार बनायें, नवाचार का सेतु बनाये और वैश्विक कल्याण की ताकत बनायें।"दोनों देशों के बीच मात्र नौ महीने में हुई मुक्त व्यापार संधि का जिक्र करते हुए श्री मोदी ने कहा कि यह न्यूजीलैंड के उद्यमों के लिए भारतीय बाजार तक पहुंच, निवेश, सेवा, प्रौद्योगिकी और प्रतिभाओं की आवाजाही के नये अवसर लेकर आयेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि साल 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार दो गुना हो जायेगा।

न्यूज़ीलैंड द्वारा अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल निवेश की ही नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा में सहभागी बनने का भी प्रतिबद्धता है।

देश में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाये गये कदमों की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में हवाई अड्डा, क्षेत्रीय संपर्क, हवाई माल परिवहन और पर्यटन तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है। उन्होंने कहा, " हम मिलकर कार्गो कॉरिडोर, हवाई संपर्क और संयुक्त पर्यटन पैकेज बना सकते हैं।"उन्होंने कहा कि कीवी, सेब, शहद और समुद्री खाद्य पदार्थों जैसे जल्द खराब होने वाले सामनों के लिए कार्गों समाधान विकसित किये जा सकते हैं। न्यूजीलैंड के पास बागवानी, डेयरी विज्ञान और वानिकी में विशाल विशेषज्ञता है। भारत के पास उपभोक्ता बाजार, फूड पार्क और कृषि-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिभा का भंडार है। दोनों देश मिलकर कृषि से बाजार की मूल्य श्रृंखला और वैश्विक निर्यात मंच बना सकते हैं।

उन्होंने न्यूजीलैंड के कारोबारियों को फिनटेक, अंतरिक्ष, शहरी परिवहन, जल प्रबंधन और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने के लिए आमंत्रित किया।

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