न्यूयॉर्क , अप्रैल 28 -- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में भारत ने सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित एवं निर्बाध समुद्री आवागमन को तत्काल बहाल करने का आह्वान किया और चेतावनी दी कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में वाणिज्यिक जहाजों पर हाल ही में हुए हमले वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा हैं।

अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के एजेंडे के अंतर्गत "समुद्री क्षेत्र में जलमार्गों की सुरक्षा एवं संरक्षण" पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की उच्च स्तरीय खुली बहस में भारतीय प्रतिनिधि योजना पटेल ने इस बात पर बल दिया कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा वैश्विक व्यापार एवं स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

जलमार्गों की सुरक्षा के लिए नए सिरे से अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान करते हुए, श्री पटेल ने कहा कि ऐसी घटनाएं अस्वीकार्य हैं और इनके परिणामस्वरूप पहले ही भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है जो बढ़ती समुद्री असुरक्षा की मानवीय कीमत को दर्शाती हैं। उन्होंने जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार का एक बड़ा हिस्सा वहन करते हैं और किसी भी व्यवधान के अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए दूरगामी परिणाम होते हैं।

श्री पटेल ने कहा कि महत्वपूर्ण जलमार्गों के लिए किसी भी खतरे का अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है क्योंकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार का अधिकांश प्रवाह इन्हीं मार्गों से होता है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से होकर गुजरने वाली नौवहन की स्वतंत्रता और वैध वाणिज्य का अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए । उन्होंने सुरक्षित एवं निर्बाध समुद्री मार्ग की तत्काल बहाली का आग्रह किया।

भारत ने एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है और अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन के पालन का दृढ़ता से समर्थन किया है क्योंकि यह नौवहन की स्वतंत्रता एवं सुरक्षित वैश्विक व्यापार सुनिश्चित करने की आधारशिला है।

भारत ने दोहराया कि समुद्री सुरक्षा वैश्विक आर्थिक समृद्धि एवं स्थिरता के लिए केंद्रीय महत्व रखती है। दुनिया के सबसे बड़े नौवहन आपूर्तिकर्ताओं में से एक होने के नाते, जो वैश्विक कार्यबल का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा है, भारत ने जहाजों की सुरक्षा एवं कल्याण पर गहरी चिंता व्यक्त की।

श्री पटेल ने कहा, "महत्वपूर्ण जलमार्गों में किसी भी प्रकार की बाधा या अवरोध वैश्विक व्यापार, ऊर्जा प्रवाह और मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को सीधे प्रभावित करता है।" उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षित और खुले समुद्रों को सुनिश्चित करना दीर्घकालिक वैश्विक शांति और समावेशी विकास के लिए आवश्यक है।

भारत की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, श्री पटेल ने याद दिलाया कि नयी दिल्ली ने अगस्त 2021 में समुद्री सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पहली खुली बहस का आयोजन किया था जिसने समुद्री चुनौतियों के लिए अधिक समन्वित वैश्विक दृष्टिकोण की नींव रखी थी।

भारत ने मौजूदा संकट से निपटने के लिए प्रमुख प्राथमिकताओं की रूपरेखा तैयार की जिसमें नौवहन सुरक्षा सुनिश्चित करना, आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखना, विशेष रूप से मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को, समुद्री स्थितिजन्य जागरूकता बढ़ाना और नाविकों के लिए संचार तंत्र को मजबूत करना शामिल है।

अपनी प्रतिक्रिया में भारत के जहाजरानी महानिदेशालय ने सभी राष्ट्र के नाविकों के लिए 24/7 हेल्पलाइन शुरू की है, जिसने पहले ही हजारों संकटकालीन कॉल और संदेशों को संभाला है।

इसके अलावा, भारत ने सदस्य देशों से हिंद महासागर क्षेत्र सूचना संलयन केंद्र (आईएफसी-आईओआर) के साथ समन्वय बढ़ाने का आह्वान किया, जो नयी दिल्ली स्थित एक केंद्र है और वास्तविक समय में समुद्री सूचना साझा करने में सुविधा प्रदान करता है। 36 देशों के संपर्क अधिकारियों एवं जिबूती आचार संहिता जैसे अंतरराष्ट्रीय संरचनाओं से जुड़े होने के कारण, यह केंद्र समुद्री क्षेत्र की जागरूकता सुनिश्चित करने और सुरक्षित नौवहन का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारतीय प्रतिनिधि ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के कारण पर्यावरणीय आपदाओं के जोखिम पर भी चिंता व्यक्त की और समुद्री निगरानी एवं समन्वय के लिए वैश्विक तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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