नयी दिल्ली , सितम्बर 24 -- भारत ने संयुक्त राष्ट्र की कई उच्चस्तरीय बैठकों में गुरुवार को आतंकवाद से निपटने और जलवायु वित्तपोषण के मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताओं को जोरदार तरीके से सामने रखा।

विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने इन बैठकों में आतंकवाद पर भारत के 'जीरो टॉलरेंस' के रुख को दोहराया और जलवायु परिवर्तन के जोखिमों का सामना कर रहे विकासशील देशों के लिए अधिक और निश्चित वित्तीय सहायता की मांग की।

विदेश मंत्रालय सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार पोस्ट में बताया कि श्री दलेला ने आतंकवाद से प्रभावित 'मित्र समूह की 7वीं मंत्रिस्तरीय बैठक' में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने भारत पर सीमा पार आतंकवाद के गंभीर प्रभाव को सामने रखा और कहा कि वैश्विक आतंकवाद-रोधी एजेंडे के केंद्र में प्रभावित देशों को रखा जाना चाहिए।

श्री दलेला ने संयुक्त राष्ट्र की जलवायु कार्रवाई और न्यायपूर्ण बदलाव पर उच्चस्तरीय बैठक में जलवायु अनुकूलन और वित्त से जुड़ी चर्चाओं में भी हिस्सा लिया।

'अनुकूलन के वित्तपोषण पर समाधान संवाद' में उन्होंने भारत की शुरुआती चेतावनी प्रणालियों और राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर की योजनाओं में जलवायु अनुकूलन के उपायों को शामिल करने के प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने देशों के नेतृत्व के स्तर पर होने वाले जलवायु अनुकूलन के लिए निश्चित वित्तीय सहायता की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसी सहायता से कमजोर देशों और समुदायों को राहत मिलनी चाहिए और उन पर कर्ज का बोझ नहीं बढ़ना चाहिए।

जलवायु वित्तपोषण पर एक अलग कार्यक्रम में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर तय योगदान के लक्ष्यों की दिशा में भारत की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देश की स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी अब 54 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

श्री दलेला ने विकासशील देशों के लिए सस्ती जलवायु वित्त व्यवस्था और बेहतर तकनीक तक पहुंच की मांग की। मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने कहा कि जलवायु वित्त से जुड़ी प्रतिबद्धताएं "नयी और अतिरिक्त" होनी चाहिए, न कि मौजूदा विकास वित्त का विकल्प।

तीनों बैठकों में उन्होंने ने आतंकवाद से जुड़ी भारत की चिंताओं को जलवायु कूटनीति से जोड़ते हुए आतंकवाद के पीड़ितों के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन जोखिम वाले देशों के लिए आसान और टिकाऊ वित्तीय व्यवस्था की मांग की।

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