पटना , मई 11 -- बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को कहा कि भारत ने प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक शक्ति का उपयोग सदैव शांति, सुरक्षा और मानव कल्याण के लिए किया है।
श्री हसनैन ने आज मुख्य अतिथि के रूप में सीमेज शैक्षणिक समूह, पटना एवं विज्ञान भारती, बिहार की ओर से आयोजित ''राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस'' पर सेमिनार एवं ''भारतीय प्राद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), बॉम्बे ई-यंत्र लैब के उद्घाटन'' में भाग लिया।
राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि भारत ने प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक शक्ति का उपयोग सदैव शांति, सुरक्षा और मानव कल्याण के लिए किया है। उन्होंने 11 मई, 1998 के परमाणु परीक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की परमाणु क्षमता का उद्देश्य शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना है।
राज्यपाल ने बिहार की प्रगति के लिए सकारात्मक वातावरण के निर्माण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि किसी भी राज्य की उन्नति संसाधनों के साथ-साथ आत्मविश्वास, आकांक्षा और सामूहिक सोच से होती है। बिहार के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और गर्व की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है।
श्री हसनैन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से खुद से तैयार किए गए तीन प्रतीकात्मक विचारों का उल्लेख किया, जिनमें भारतीय नौसेना के एक संभावित युद्धपोत "आईएनएस पटना" की कल्पना, वर्ष 2028 की सेना दिवस परेड पटना में आयोजित करने का विचार तथा "पटना पैट्रियट्स" नाम से एक आईपीएल टीम की परिकल्पना शामिल थी। उन्होंने कहा कि ऐसे विचार समाज में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का निर्माण करते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि प्रौद्योगिकी तभी प्रभावी सिद्ध होती है जब उसके साथ समाज की आकांक्षाएँ और विकास की इच्छाशक्ति जुड़ी हो। उन्होंने बिहार के युवाओं को राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि यह राज्य देश के सबसे युवा राज्यों में से एक है और यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल और आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए, तो बिहार आने वाले वर्षों में नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकता है।
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