ईटानगर , अगस्त 29 -- भारत और जर्मनी के रिसर्च सहयोग से अरुणाचल प्रदेश में रोव बीटल (एक प्रकार का भृंग या कीड़ा) की 15 ऐसी प्रजातियों का पता चला है जो विज्ञान के लिए पूरी तरह से नयी हैं। यह पूर्वी हिमालय में कीटों की विविधता में एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी है।

नयी खोजी गयी प्रजातियां 'स्टेनस' जीनस से संबंधित हैं। यह रोव बीटल का एक बहुत विविध समूह है जो आमतौर पर नमी वाली जगहों जैसे कि नदियों के किनारे, वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) और गीले पत्तों के ढेर में पाया जाता है।

इन खोजों के बाद अरुणाचल प्रदेश में दर्ज स्टेनस प्रजातियों की कुल संख्या 103 हो गयी है। इनमें 21 प्रजातियां ऐसी हैं जो भारत के लिए नयी हैं और 44 प्रजातियां ऐसी हैं जो राज्य के लिए नयी हैं।

इन खोजों को औपचारिक रूप से 'लिंज़र बायोलॉजिसचे बेट्रेज', वॉल्यूम 58(1), पेज 523-569 में प्रकाशित किया गया है। यह रिसर्च पेपर प्रसिद्ध टैक्सोनॉमिस्ट डॉ. वोल्कर पुथ्ज़ ने लिखा है। नयी खोजी गई कई प्रजातियों का नाम इस प्रोजेक्ट से जुड़े रिसर्चर्स के सम्मान में रखा गया है।

'स्टेनस गोगोई' , 'एस. डोबियम' और 'एस. सोनुआ' नाम राजीव गांधी यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग के डॉ. हिरेन गोगोई, डोबियम टगाम और सोनू सिंह के सम्मान में रखे गए हैं। वहीं, 'एस. ओलिवर' और 'एस. टोबियास' नाम जर्मनी की ट्यूबिंगन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ इवोल्यूशन एंड इकोलॉजी के प्रोफेसर ओलिवर बेट्ज़ और टोबियास मेनडा के सम्मान में रखे गये हैं।

रिसर्च टीम ने दूरदराज और मुश्किल पहाड़ी इलाकों में फील्डवर्क के दौरान स्थानीय समुदायों से मिले सहयोग को भी सराहा। इसमें शामिल समुदायों में पाक्के केसांग का निशि समुदाय, वेस्ट कामेंग के ईगलनेस्ट क्षेत्र का शेरडुकपेन और बुगुन समुदाय, और शी योमी जिले का मेम्बा और आदि समुदाय शामिल थे।

यह सहयोग 2021 में शुरू हुआ था जब रोव बीटल के विशेषज्ञ प्रोफेसर ओलिवर बेट्ज़ ने अरुणाचल प्रदेश में कीटों की विविधता का पता लगाने के लिए राजीव गांधी यूनिवर्सिटी से संपर्क किया था। इसके बाद मई 2023 में इसके और ट्यूबिंगन यूनिवर्सिटी के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये। इसमें जर्मन रिसर्च फाउंडेशन का सहयोग और नेशनल बायोडायवर्सिटी अथॉरिटी तथा अरुणाचल प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से जरूरी अनुमतियां शामिल थीं। दिसंबर 2024 और मार्च 2025 के बीच, शोधकर्ताओं ने पक्के केसांग, वेस्ट कामेंग और शी योमी ज़िलों में चार फील्ड अभियान चलाए। एस्पिरेटर, छलनी और स्वीप नेट का इस्तेमाल करके नमूने इकट्ठा किये गये, जिससे विज्ञान के लिए पहले से अज्ञात कई प्रजातियों की पहचान हुई।

हाल ही में दर्ज की गई ये बीटल बहुत छोटी हैं, जिनका आकार 1.9 से 6.5 मिलीमीटर के बीच है।

गौरतलब है कि रोव बीटल दुनिया भर में सबसे विविध कीट समूहों में से एक हैं, जिनकी लगभग 4,000 जेनेरा (वंश) में 63,000 से ज़्यादा प्रजातियों का वर्णन किया गया है। ज़्यादातर स्टेनस प्रजातियां छोटे शिकारी होती हैं जो नमी वाली जगहों पर रहती हैं और स्प्रिंगटेल और एफिड्स जैसे छोटे जीवों को खाती हैं। उनके पास जीभ जैसा एक खास अंग होता है जिसे वे बाहर निकाल सकती हैं, जिससे वे तेज़ी से शिकार पकड़ पाती हैं। यह जीनस अपनी खास खूबियों के लिए भी जाना जाता है, जैसे कि केमिकल डिफेंस मैकेनिज्म और कुछ प्रजातियों की पानी की सतह पर चलने की क्षमता।

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