नयी दिल्ली , अगस्त 07 -- राज्यसभा ने नौ अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की 84 वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने पर सदस्यों से कहा कि नौ अगस्त, 1942 का दिन राष्ट्र के स्वतंत्रता संग्राम के निर्णायक मील के पत्थरों में से एक, ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगाँठ का प्रतीक है। महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रारम्भ किए गए इस आंदोलन ने आजादी के संघर्ष को निर्णायक गति प्रदान की। "करो या मरो" के प्रखर आह्वान ने देशभर के लाखों भारतीयों को सभी प्रकार की बाधाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र की स्वतंत्रता के साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होने की प्रेरणा दी।

सभापति ने कहा कि भीषण दमन, कारावास तथा असंख्य कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद स्वतंत्रता सेनानियों ने असाधारण साहस, दृढ़ संकल्प और स्वतंत्रता के उद्देश्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का परिचय दिया। उनके निःस्वार्थ बलिदानों और अडिग संकल्प ने राष्ट्रीय आंदोलन को सुदृढ़ किया तथा 1947 में देश की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया।

उन्होंने कहा, "आज जब हम इस ऐतिहासिक अवसर का स्मरण कर रहे हैं, आइए हम भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले तथा अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए महान बलिदान देने वाले सभी महानुभावों को अपनी श्रद्धापूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करें। देशभक्ति, एकता, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण के उनके आदर्श एक सशक्त, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक प्रयास में आज भी हमें निरंतर प्रेरित करते हैं।"इसके बाद सदस्यों ने स्वतंत्रता आंदोलन में आहुति देने वाली वीर आत्माओं की पावन स्मृति में मौन रखा।

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