गोरखपुर , दिसंबर 10 -- उत्तराखंड के राज्यपाल (से नि) लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा है कि युवा पीढ़ी के दम पर वर्ष 2047 तक भारत को अर्थव्यवस्था एवं तकनीक के क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान पर आने से, विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता है।
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह बुधवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक सप्ताह समारोह के मुख्य महोत्सव को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहा कि देश की 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष के नीचे की आयु की है। इस युवा पीढ़ी के दम पर वर्ष 2047 तक भारत को अर्थव्यवस्था एवं तकनीक के क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान पर आने से, विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता है। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। देश की 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष के नीचे की आयु की है।
समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल ने कहा कि कहा कि भारत के युवाओं में जो सामर्थ्य है वह वर्तमान के साथ भविष्य को भी आलोकित करेगा। भारत के युवा 2047 के आत्मनिर्भर व विकसित भारत की आधारशिला हैं। हमारा भी यह कर्तव्य है कि इस दिशा में हम सब अपनी जिम्मेदारी को पहचाने। उन्होंने कहा कि आज का युग अवसरों का युग है। इस अवसर का हमें बेहतरीन उपयोग करना चाहिए।
श्री सिंह ने कहा कि हम सब भारतीयों के डीएनए में सभ्यता, संस्कृतिए वेद, उपनिषद एवं पुराणों का ज्ञान समाहित है जो तकनीकी रूप से हमको सक्षम बनाता है। हमारे ज्ञान के दम पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आगे चलकर आब्सल्यूट इंटेलिजेंस बनेगा और उसके बाद यह कॉस्मिक इंटेलिजेंस का रूप लेगा। कॉस्मिक इंटेलिजेंस सनातन ज्ञान परंपरा का ही अंश होगा।
राज्यपाल ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक समारोह हमें साहस, शौर्य व पराक्रम के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि एक विजेता के जीत की आदत कभी खत्म नहीं होती। जीवन में एक सफलता ही दूसरे सफलता को जन्म देती है। सफलता उन्ही को मिलती है जिनके पास साहस के साथ कार्य करने की क्षमता होती है। उन्होंने कहा कि हमारी प्रतिस्पर्धा स्वयं के साथ है। यदि हम स्वयं को पहचानेंगे तो ही हम जीवन में राजा बन पायेंगे।
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि भारत की विविधता ही भारत की एकता का आधार है। गुरुनानक देव जी ने गुरुग्रन्थ साहिब में सबसे पहला शब्द ष्एकमष् अर्थात एकता को रखा है। हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। हमारी अलग वेशभूषा, परंपरा, रीति.रिवाज व भाषा है लेकिन हम सबका एक भाव भारतीयता का है। राष्ट्र हमारा धर्म व सेवा हमारी उपासना है। उन्होंने कहा कि देश को यदि विश्व का लीडर बनाना है तो हमें अन्य लोगों की अपेक्षा अतिरिक्त कार्य करना पड़ेगा। बिना परिश्रम कुछ भी प्राप्त नही हो सकेगा।
श्री सिंह ने युवाओं से से कहा कि वे अपने जीवन में खुली आंखों से असीमित सपने देखे और उसे पूरा करने के लिए अपने अंदर दृढ़ इच्छा शक्ति पैदा करें। वे अपनी सोच, विचार और धारणा के स्तर को ऊंचा बनाएं। उनकी सोच लाख से करोड़ए करोड़ से बिलियन तथा बिलियन से ट्रिलियन की ओर बढ़ने की होनी चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि 21वीं शताब्दी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलाजी, नैनो टेक्नोलाजी, रेयर अर्थ मैटेरियल की शताब्दी है। हमारे युवाओं को इसके बारे में सोंचना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत पूरे विश्व को मार्गदर्शन देने देने की भूमिका में शामिल हो चुका है। पीएम मोदी ने विज्ञान, उद्योग, रक्षा अवसंरचना, अंतरिक्ष, ऊर्जा व सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। चन्द्रयान, गगनयान, डिजिटल भारत, सेमीकंण्डक्टर मिशन, आयुष्मान भारत, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का माध्यम बने है। यह सब राष्ट्र के उत्थान का माध्यम है।
श्री सिंह ने कहा कि अंत शब्द ही संत ओर महंत को जन्म देता है। गोरखपुर सनातन धर्म की वह धुरी है जहां साधना, सघर्ष, साहित्य के साथ संस्कृति एवं राष्ट्र के प्रति त्याग का भाव भी है। गोरखपुर में महायोगी गुरु गोरखनाथ ने धर्म, योग ओर आध्यात्म को लोक जीवन में प्रतिष्ठित कर भारत की सनातन चेतना को जन.जन तक पहुंचाया था। महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवेद्यनाथ एवं अन्य महंतो ने भी जन चेतना को जनसेवा के साथ आगे बढ़ाया। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद उसी का एक हिस्सा है।
योगी की निस्वार्थ सेवा भावना और निडरता की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल श्री सिंह ने कहा कि योगी जी, दृढ़ निश्चयी मुख्यमंत्री हैं। कड़े निर्णयों से उन्होंने उत्तर प्रदेश को माफिया, क्राइम और गुंडाराज से मुक्ति दिलाई है। उन्होंने कहा कि यूपी के सीएम योगी के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। उनका हर कार्य जन कल्याण के लिए है। कठोर परिश्रम करने वाले योगी जी सदैव राष्ट्र सर्वोपरि की भाव ज्योति को प्रज्वलित करते हैं।
समारोह के दौरान उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष राजेश मोहन सरकार ने उत्तरीय और स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर श्री सिंह ने शिक्षा परिषद के लिए अपने साथ लाए स्मृतिचिन्ह को श्री सरकार को भेंट किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित