रांची , जून 22 -- झारखंड के गिरिडीह जिले के आदर्श कॉलेज, राजधनवार (विनोबा भावे विश्वविद्यालय) के प्राचार्य एवं प्रख्यात गणितज्ञ प्रो. (डॉ.) बिमल कुमार मिश्रा को उच्च शिक्षा, गणितीय अनुसंधान तथा साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ते हुए भारत सरकार द्वारा एक नया पेटेंट प्रदान किया गया है।
भारत के पेटेंट कार्यालय द्वारा "ए साइबर सेक्यूरिटी सिस्टम फॉर ए स्मार्ट सीटी इंफ्रास्ट्रकचर एंड ए मेथड फॉर द सेम" शीर्षक आविष्कार के लिए पेटेंट संख्या 592958 दिनांक 22 जून 2026 को प्रदान किया गया है। आवेदन संख्या 202541050488 के अंतर्गत यह पेटेंट 26 मई 2025 को दायर किया गया था और इसकी वैधता 20 वर्षों तक रहेगी।
इस आविष्कार में स्मार्ट सिटी अवसंरचना को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी तथा गणितीय मॉडलिंग आधारित एक उन्नत साइबर सुरक्षा प्रणाली विकसित की गई है। यह प्रणाली स्मार्ट शहरों में प्रयुक्त एवं एलओटी उपकरणों, सेंसर नेटवर्क, स्मार्ट ग्रिड, परिवहन प्रणालियों तथा डिजिटल प्रशासनिक सेवाओं को साइबर खतरों से बचाने में सहायक होगी।
विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि यह प्रो. (डॉ.) बिमल कुमार मिश्रा का 15वां पेटेंट है। उनके पेटेंट भारत के अतिरिक्त दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया तथा जर्मनी जैसे देशों में भी स्वीकृत एवं प्रदान किए जा चुके हैं। साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), इंटरनेट ऑफ मेडिकल थिंग्स (आईओएमटी), स्मार्ट शहर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा गणितीय मॉडलिंग के क्षेत्रों में उनके नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है।
प्रो. मिश्रा देश के अग्रणी गणितज्ञों में गिने जाते हैं। उन्होंने गणित विषय में डी.एससी. की उपाधि प्राप्त की है तथा वर्तमान में आदर्श कॉलेज, राजधनवार के प्राचार्य के रूप में कार्यरत हैं। इससे पूर्व वे बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), मेसरा में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। वे लगभग तीन दशकों से अधिक समय से उच्च शिक्षा, अनुसंधान और शैक्षणिक प्रशासन से जुड़े हुए हैं।
उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों में 140 से अधिक शोध-पत्रों का प्रकाशन, 27 पीएच.डी. शोधार्थियों का सफल मार्गदर्शन, 3900 से अधिक उद्धरण (साइटेशन), एच-इंडेक्स 29 तथा विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में दो बार स्थान प्राप्त करना शामिल है। वे अनेक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं के संपादकीय मंडलों से भी जुड़े हुए हैं तथा गणितीय महामारी विज्ञान, साइबर महामारी मॉडलिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, फ्रैक्शनल कैलकुलस और स्मार्ट सिस्टम सुरक्षा के क्षेत्रों में उनके शोध व्यापक रूप से उद्धृत किए जाते हैं।
इस नवीन पेटेंट की स्वीकृति पर शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों ने प्रो. मिश्रा को बधाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट शहरों की साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में यह आविष्कार भविष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है तथा भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी सुदृढ़ करेगा।
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