नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने कहा है कि युद्धों में रॉकेट, मिसाइलों और ड्रोन के बढते इस्तेमाल को देखते हुए भारत को भी चीन और पाकिस्तान की तर्ज पर रॉकेट मिसाइल फोर्स बनानी होगी और साथ ही ड्रोन का जखीरा भी बढाना होगा। जनरल द्विवेदी ने मंगलवार को यहां वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में सवालों के जवाब में कहा कि भारत को मिसाइल फोर्स की जरूरत है। उन्होंने कहा ," रॉकेट और मिसाइल आपस में एक-दूसरे से जुड़े हैं और ये दोनों एक ही तरह से काम कर सकते हैं। हम एक रॉकेट-मिसाइल फोर्स की जरूरत देख रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तान ने रॉकेट फाेर्स स्थापित की है और चीन ने भी ऐसा ही एक बल बनाया है। यह समय की जरूरत है कि भारत भी एक ऐसी फोर्स बनाये। "उन्होंने कहा कि भारत ने पिनाका प्रणाली का 120 किलोमीटर की रेंज तक परीक्षण किया है। सेना ने कई अन्य अनुबंधों पर भी हस्ताक्षर किए हैं जिनसे 150 किलोमीटर तक की रेंज का विस्तार किया जाएगा, और आगे चलकर हम इसे 300 से 450 किलोमीटर की रेंज तक पहुंचते हुए देखेंगे। आपने प्रलय और ब्रह्मोस के बारे में भी अवश्य सुना होगा।"युद्धों में ड्रोनों के बढते इस्तेमाल पर जनरल द्विवेदी ने कहा कि सेना ने यह निर्णय लिया है कि वह अधिक से अधिक ड्रोन खुद बनाएगी। उन्होंने कहा कि आप यह कमान की क्षमता पर निर्भर है लेकिन यह कहा जा सकता है कि भारतीय सेना की हर कमान या तो 5,000 ड्रोन बना सकती है या पहले ही बना चुकी है। उन्होंने कहा कि ये छोटे ड्रोन नहीं हैं। सेना ने लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाले ड्रोन का परीक्षण किया है, और आगे चलकर हम इनकी रेंज को बढ़ाने जा रहे हैं।

पाकिस्तान की ओर से सीमा पर ड्रोन की बढती गतिविधियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से आने वाले ड्रोन को लेकर पाकिस्तान को चेतावनी दी गयी है और कहा गया है कि भारत को इस तरह की हरकतें मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि सैन्य संचालन महानिदेशक स्तर की बातचीत में इस मुद्दे पर चर्चा हुई है उन्हें साफ शब्दों में बता दिया गया है कि यह हमें स्वीकार्य नहीं है और इसे रोका जाना चाहिए।

उन्होंने कहा ," जो ड्रोन हमने देखे हैं, वे बहुत छोटे ड्रोन हैं। वे अपनी लाइट जलाकर उड़ते हैं। वे बहुत अधिक ऊँचाई पर नहीं उड़ते और बहुत कम अवसरों पर देखे गए हैं। 10 जनवरी को लगभग 6 ड्रोन देखे गए थे, और 11 तथा 12 जनवरी को 2 से 3 ड्रोन देखे गए।"सेना प्रमुख ने कहा कि उनके हिसाब से ये रक्षात्मक ड्रोन थे जो यह देखना चाह रहे कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई तो नहीं की जा रही है। यह भी संभव है कि वे यह देखना चाहते हों कि सेना की ओर से कोई कमी, कोई ढील, या कोई ऐसा रास्ता तो नहीं है जिसके ज़रिये वे आतंकवादियों को भेज सकें। उन्हें ऐसी कोई कमी नहीं मिली होगी और उन्होंने यह देख लिया होगा कि इस तरह की कोई गुंजाइश नहीं है।

एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सेना प्रधानमंत्री के 'जेएआई' यानी जय के नारे पर काम कर रही है जिसमें तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण , आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर दिया जा रहा है।

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