चेन्नई , अक्टूबर 22 -- देश की 2.31 करोड़ अंतर्देशीय मछुआरा आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 44 प्रतिशत है। प्रदूषण, आवास क्षरण और मीठे पानी के संसाधनों की प्रतिस्पर्धी मांगें इस क्षेत्र की स्थिरता के लिए हालांकि बड़ी चुनौतियां पेश कर रही हैं।

खाद्य एवं कृषि संगठन के सहयोग से बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम इंटर-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन की तैयार की गई रिपोर्ट 'कंट्री प्रोफाइल ऑन इंडियाज इनलैंड स्मॉल-स्केल फिशरीज' में यह आंकड़े सामने आए हैं।

यह रिपोर्ट पर्यावरण के दबावों और आजीविका की चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ मत्स्य पालन के आंकड़ों और विकास योजनाओं में महिलाओं के योगदान के महत्व पर जोर देती है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश के 2.31 करोड़ अंतर्देशीय मछुआरों में महिलाओं की संख्या 1.01 करोड़ है। रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि कटाई के बाद की गतिविधियों और बिना वेतन वाले पारिवारिक कार्यों में महिलाओं के योगदान का ठीक से दस्तावेजीकरण नहीं किया गया है।

यह कंट्री प्रोफाइल गुरुवार को मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित 'नेशनल प्लान ऑफ एक्शन ऑन स्मॉल-स्केल इनलैंड फिशरीज' की लॉन्च कार्यशाला के दौरान प्रस्तुत की गई।

रिपोर्ट में प्रदूषण, आवास क्षरण और नदियों के बाधित जुड़ाव को प्रमुख चिंताओं के रूप में पहचाना गया है। सिंचाई और अन्य उपयोगों सहित पानी की प्रतिस्पर्धी मांगें, बाढ़, सूखा और जलाशयों के जलस्तर में गिरावट, मत्स्य संसाधनों और उन पर निर्भर समुदायों पर दबाव बढ़ा सकती हैं। इसमें असुरक्षित मछली पकड़ने की पहुंच और लीजिंग व्यवस्था के साथ-साथ मत्स्य पालन, सिंचाई, वन, राजस्व और स्थानीय अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों को भी ऐसे मुद्दों के रूप में चिह्नित किया गया है जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

बीओबीपी-आईजीओ के निदेशक डॉ. पी. कृष्णन ने कहा कि जलवायु लचीलेपन और मीठे पानी के संसाधनों को स्थायी रूप से प्रबंधित करने की आवश्यकता पर बढ़ते ध्यान के बीच ये चिंताएं अधिक महत्व रखती हैं। उन्होंने कहा कि जलीय आवासों को बनाए रखना और व्यापक जल-संसाधन योजना में मत्स्य पालन का ध्यान रखना मछली आबादी और स्थानीय आजीविका को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यह अंतर-सरकारी निकाय बंगाल की खाड़ी के देशों में एनपीओए के विकास के लिए परिचालन मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता प्रदान करता है, जिससे क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को देश-स्तरीय कार्रवाई में बदलने में मदद मिलती है।

डेटा संग्रह में कमियों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों में निर्वाह के लिए मछली पकड़ने और अनौपचारिक विपणन चैनलों का प्रतिनिधित्व कम है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिकाओं की बेहतर पहचान क्षेत्र के कार्यबल को समझने और यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि मत्स्य विकास पहल महिलाओं की जरूरतों और योगदान को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित करे।

मछुआरों, उनकी पकड़ और व्यक्तिगत जल-निकाय पारिस्थितिकी प्रणालियों पर बेहतर डेटा अधिकारियों को अधिक लक्षित हस्तक्षेप तैयार करने तथा आजीविका और खाद्य सुरक्षा में छोटे पैमाने के मत्स्य पालन के योगदान का आकलन करने में मदद कर सकता है।

सतत संसाधन प्रबंधन और आजीविका सुरक्षा के लिए एक समन्वित ढांचे के साथ इस क्षेत्र पर राष्ट्रीय कार्य योजना विकसित करने के लिए भारत के प्रयास जारी हैं।

दो दिवसीय राष्ट्रीय लॉन्च कार्यशाला का आयोजन केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग द्वारा बीओबीपी-आईजीओ के सहयोग से किया जा रहा है और मध्य प्रदेश सरकार इसकी मेजबानी कर रही है। एफएओ के तकनीकी निरीक्षण और आईसीएआर मत्स्य संस्थानों के वैज्ञानिक समर्थन के साथ, इस कार्यशाला का उद्देश्य सतत् संसाधन प्रबंधन, हितधारकों की सहभागिता और आजीविका सुरक्षा के लिए एक समन्वित ढांचा विकसित करना है।

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