बेंगलुरु , मई 10 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि बेंगलुरु केवल भारत की वैश्विक प्रौद्योगिकी राजधानी ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक पहचान को नयी ऊंचाई देने वाला शहर भी बन चुका है।
श्री मोदी ने आर्ट ऑफ लिविंग की 45वीं वर्षगांठ के अवसर पर नवनिर्मित 'ध्यान मंदिर' का उद्घाटन करते हुए कहा कि योग, ध्यान और प्राणायाम भारत के संस्कारों का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और आज पूरी दुनिया भारत की इन आध्यात्मिक परंपराओं से प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा, "बेंगलुरू का माहौल कुछ अलग ही होता है। यह शहर सॉफ्टवेयर और सेवाओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, लेकिन भारत की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक चेतना को भी इस शहर ने नयी ऊंचाई दी है। योग, ध्यान, प्राणायाम, भारत के संस्कारों का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। आज दुनिया भर के लोग भारत के इन आध्यात्मिक संस्कारों से प्रभावित हैं, और इन्हीं पुरातन संस्कारों से भारत की भी अनेक संस्थाओं को प्रेरणा मिलती रही है।"उन्होंने कहा कि 45 वर्ष पहले श्री श्री रविशंकर ने आर्ट ऑफ लिविंग के रूप में जो बीज बोया था, वह आज विशाल वटवृक्ष बन चुका है जिसकी शाखाएं दुनिया भर में करोड़ों लोगों के जीवन को स्पर्श कर रही हैं।
श्री मोदी ने कहा कि भारत की विविधताओं को जोड़ने वाला मूल तत्व "दूसरों के लिए जीना" है। उन्होंने कहा, "हमारे यहां कहा गया है, अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम्। परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम्॥ अर्थात, दूसरों की सेवा करना पुण्य है, और पीड़ा देना पाप है। सेवा परम धर्म है, ये हमारे समाज का स्वाभाविक चरित्र है। पीढ़ी दर पीढ़ी यही संस्कार हमें प्रेरित करते रहे हैं।"उन्होंने कहा कि भारत के अनेक आध्यात्मिक आंदोलनों ने स्वयं को मानव सेवा के माध्यम से अभिव्यक्त किया है और आर्ट ऑफ लिविंग की हर गतिविधि में सेवा भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
श्री मोदी ने कहा कि किसी भी अभियान की सफलता तभी संभव है जब उसके साथ समाज की शक्ति जुड़ती है। उन्होंने कहा कि समाज राजनीति और सरकारों से भी अधिक शक्तिशाली होता है और सरकार तभी सफल हो सकती है जब समाज राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाए।
उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया, बल्कि लोगों के जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन चुका है।
श्री मोदी ने कहा कि तकनीक लोगों को जोड़ रही है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी स्वयं से जुड़ना है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण ऐसे युवाओं से होगा जो मानसिक रूप से शांत, सामाजिक रूप से जिम्मेदार और समाज के प्रति संवेदनशील हों।
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