नयी दिल्ली , अक्टूबर 27 -- विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत की समृद्ध आनुवंशिक विविधता में देश को जीन अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक संसाधन बनाने की अपार संभावना है। इसके विशिष्ट आनुवंशिक संसाधनों की वजह से दुनिया के अन्य देश आने वाले समय में भारत की ओर देखेंगे।

डॉ. सिंह ने मंगलवार को यहां भारत मंडपम में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी) 2026 में सिस्टम और सिंथेटिक बायोलॉजी पर एक सत्र को संबोधित करते हुए,जैव प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं के निर्माण और भारत की वैज्ञानिक ताकतों को अनुसंधान के अवसरों तथा व्यावहारिक अनुप्रयोगों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की उल्लेखनीय आनुवंशिक और फेनोटाइपिक प्रोफ़ाइल अनुसंधान के लिए एक मूल्यवान आधार प्रदान करती है। खासतौर से बीमारी के स्वरूप में बदलाव को समझने और स्वास्थ्य सेवा में नई संभावनाओं का पता लगाने के मामले में यह बेहद उपयोगी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जैसे-जैसे भारत अपनी अनुसंधान क्षमताओं को विकसित और विस्तारित करेगा, यह देश वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए आनुवंशिक संसाधनों के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभर सकता है।

उन्होंने जीन संश्लेषण में स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के महत्व पर भी जोर दिया। विशेष अनुसंधान आवश्यकताओं के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता समय, पहुंच और अनुसंधान की निरंतरता के मामले में भारतीय वैज्ञानिकों के लिए चुनौतियां पैदा कर सकती है। इस क्षेत्र में घरेलू क्षमताओं के निर्माण से शोधकर्ताओं को अपने काम को अधिक कुशलता से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और देश के जैव प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रतिभा है। सरकार अनुसंधान तथा नवाचार को उच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहायता प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इनमें उद्योगों की ज्यादा भागीदारी और आशाजनक वैज्ञानिक कार्यों के लिए वित्त पोषण शामिल है।

डॉ. सिंह ने विषयों के बढ़ते तालमेल और जीव विज्ञान, अभियांत्रिकी, गणित तथा विशेषज्ञता के अन्य क्षेत्रों को एक साथ लाने की आवश्यकता के बारे में भी बात की। जैसे-जैसे वैज्ञानिक अनुसंधान अधिक जटिल अनुप्रयोगों और नई प्रौद्योगिकी की ओर बढ़ रहा है, इस प्रकार का अंतःविषय सहयोग तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

मंत्री ने परमाणु चिकित्सा में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने उभरते अनुसंधान अवसरों के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने और इस क्षेत्र में व्यापक भागीदारी को सक्षम बनाने के महत्व पर चर्चा की। इस सत्र में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले शामिल थे। इसमें वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने सिंथेटिक बायोलॉजी की क्षमताओं और भारत में उभरती जैव प्रौद्योगिकी क्षमताओं पर चर्चा की।

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