दरभंगा , जुलाई 26 -- बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने रविवार को कहा कि भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक आत्मा और सामाजिक न्याय का आधार है। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के दरबार हॉल में फोरम फॉर पीस एंड जस्टिस के बैनर तले आयोजित "समाज में शांति और न्याय की स्थापना" विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए श्री चौधरी ने कहा कि संविधान की मूल भावना तभी साकार होगी, जब उसके आदर्श आम नागरिक के व्यवहार और जीवन का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व का अधिकार प्रदान करता है तथा सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करता है।

श्री चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति का अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है।उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में भारतीय संविधान, उसकी प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों तथा संवैधानिक मूल्यों का प्रभावी अध्ययन कराया जाए। उनका कहना था कि यदि युवाओं में संविधान के प्रति सम्मान, कानून के शासन में विश्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित होगी, तो देश में शांति, न्याय और सामाजिक सद्भाव और अधिक मजबूत होगा।

मुख्य अतिथि एवं कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कहा कि शांति और न्याय किसी भी सभ्य समाज की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब समाज में सभी वर्गों को समान अवसर, सम्मान और न्याय प्राप्त हो। इसके लिए प्रत्येक नागरिक को सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि शिक्षण संस्थान संवैधानिक चेतना विकसित करने के सबसे प्रभावी माध्यम हैं और इस दिशा में उन्हें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने बताया कि शांति, न्याय, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द को मजबूत किए बिना विकसित एवं समावेशी समाज की कल्पना संभव नहीं है।

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