पटना , जून 19 -- बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने 18, जून 2026 को किर्गिज़ गणराज्य के चोल्पोन-अता में आयोजित इस्सिक-कुल अंतरराष्ट्रीय फोरम-40 के आधिकारिक उद्घाटन समारोह में भाग लिए और कहा कि भारत और मध्य एशिया की साझा विरासत से प्रेरणा लेते हुए संवाद, सांस्कृतिक सहभागिता एवं पारस्परिक सीख के माध्यम से समकालीन साझेदारियों को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकताफोरम का उद्घाटन किर्गिज़ गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम सादिर झापारोव ने विभिन्न देशों से आए प्रतिष्ठित नेताओं, नीति-निर्माताओं, विद्वानों एवं प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया।
श्री हसनैन ने फोरम के प्रथम पूर्ण अधिवेशन को संबोधित करते हुए मध्य एशिया के साथ भारत के स्थायी सभ्यतागत संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने क्षेत्र के साथ भारत के प्राचीन ज्ञान-आधारित संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों के संगम का केंद्र रहा है। उन्होंने भारत और मध्य एशिया की साझा विरासत से प्रेरणा लेते हुए संवाद, सांस्कृतिक सहभागिता एवं पारस्परिक सीख के माध्यम से समकालीन साझेदारियों को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
राज्यपाल ने इस अवसर पर ''मानवता के भविष्य के लिए सभ्यतागत साझेदारियों का पुनर्जीवनः ज्ञान के माध्यम से शक्ति विषय पर एक विशेष व्याख्यान भी दिया। उन्होंने बिहार की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नालंदा विश्वविद्यालय है, जो विश्व के सबसे प्राचीन एवं महान अंतरराष्ट्रीय शिक्षण केंद्रों में से एक था, जहाँ एशिया के विभिन्न देशों से विद्वान ज्ञान एवं विचारों के आदान-प्रदान के लिए आते थे।
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