नयी दिल्ली, जुलाई 26 -- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान के केंद्रीय राज्य मंत्री मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को भारत के विभाजन को "इतिहास की सबसे बड़ी भूल" करार दिया और कहा कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) को वापस लेना ही भारत और पाकिस्तान के बीच एकमात्र लंबित मुद्दा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश का सुरक्षा परिदृश्य एक निर्णायक बदलाव से गुज़रा है और बाहरी आक्रमण के खिलाफ केवल प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण से निर्णायक एवं सक्रिय जवाबी कार्रवाई वाले दृष्टिकोण में परिवर्तित हुआ है।

डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली के कश्मीरी सांस्कृतिक केंद्र में 'जम्मू-कश्मीर पीपल्स फोरम' और 'पीओजेके यूथ फोरम' (जो मीरपुर बलिदान भवन समिति की एक इकाई है) के सहयोग से आयोजित 27वें कारगिल विजय दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। सांसद सुश्री बांसुरी स्वराज इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं जबकि कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक कर्नल के.के. शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम का आयोजन जम्मू-कश्मीर पीपल्स फ़ोरम के संयोजक महिंदर मेहता और पीओजेके यूथ फ़ोरम की अगुवाई में किया गया ताकि 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कारगिल विजय दिवस को याद करने और देश के लिए नए संकल्प का दिन बताते हुए कहा कि यह जीत भारतीय सशस्त्र बलों के अदम्य साहस और भारत की एकता, संप्रभुता एवं अखंडता की रक्षा के प्रति देश की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कारगिल से मिली सीख आज भी प्रासंगिक है क्योंकि देश के सामने आने वाली चुनौतियों के लिए लगातार सतर्क रहने और राष्ट्रीय एकता कायम रखने की आवश्यकता बनी हुई है।

कारगिल युद्ध के ऐतिहासिक संदर्भ की बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1999 की घटनाओं को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता बल्कि इन्हें बंटवारे के समय से शुरू हुए घटनाक्रमों की एक लंबी कड़ी के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। देश के विभाजन को "इतिहास की सबसे बड़ी भूल" बताते हुए उन्होंने कहा कि इस निर्णय से लोगों को बहुत तकलीफ़ें झेलनी पड़ीं, लाखों लोग बेघर हो गए और दशकों तक चलने वाली दुश्मनी की नींव पड़ी। इस दुश्मनी में 1947, 1965, 1971 और कारगिल की लड़ाइयां, साथ ही लगातार सीमा-पार आतंकवाद और छद्म युद्ध शामिल हैं। उन्होंने आज़ाद भारत में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को भी सबसे गंभीर मानवीय त्रासदियों में से एक करार दिया।

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