नयी दिल्ली , मार्च 02 -- भारत और कनाडा ने यूरेनियम, दुर्लभ खनिजों, रक्षा, प्रौद्योगिकी, और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के छह समझौता ज्ञापनों और सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए आठ घोषणाएं की। दोनों देशों ने भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता के लिए संदर्भ शर्तों को अंतिम रूप भी दिया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत यात्रा पर आये कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों नेताओं की मौजूदगी में इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये। दोनों देशों के विश्वविद्यालयों और संस्थानों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य देखभाल , कृषि और नवाचार के क्षेत्र में 24 समझौता ज्ञापनों की घोषणा की गयी। कनाडा के विश्वविद्यालयों के भारत में अपने परिसर खोलने पर भी दोनों देशों के बीच सहमति बनी है।

दोनों देशों ने आर्थिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और संभावनाओं का पूरा फायदा उठाने के लिए भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता की संदर्भ शर्तों को अंतिम रूप दिया है। इसके बाद अब दोनों देशों के बीच समझौते की वार्ता शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को सुदृढ़ करेगा और वर्ष 2030 तक 50 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।

अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत-कनाडा-ऑस्ट्रेलिया त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किये गये।

दोनों देशों ने राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान, कुंडली में संयुक्त दाल प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की भी घोषणा की। यह केन्द्र नवाचार के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण क्षमताओं और पोषण-संवेदी खाद्य प्रणालियों को सुदृढ़ करेगा।

इसके अलावा भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और कनाडा परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच यूरेनियम अयस्क की आपूर्ति के लिए भी दीर्घकालिक वाणिज्यिक अनुबंध किया गया है। इसे भारत में परमाणु ऊर्जा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे विकसित भारत पहल के अंतर्गत वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा प्राप्त करने के भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में मदद मिलेगी।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और कनाडा के संबंधित संस्थान के बीच ग्लोबलिंक रिसर्च इंटर्नशिप के लिए भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये हैं। इसके अंतर्गत वर्ष 2027 से तीन वर्षों तक प्रति वर्ष अधिकतम 300 पात्र भारतीय विद्यार्थियों के लिए पूर्णतः वित्तपोषित इंटर्नशिप की व्यवस्था की गयी है। ये छात्र विभिन्न शैक्षणिक विषयों-विज्ञान, अभियांत्रिकी और गणित से लेकर मानविकी और सामाजिक विज्ञान तक में कनाडाई शैक्षणिक संस्थानों के संकाय सदस्यों के मार्गदर्शन में 12 सप्ताह की पूर्णतः वित्तपोषित अनुसंधान इंटर्नशिप करेंगे।

दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग पर भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं। यह भारत और कनाडा के बीच सुरक्षित और सुदृढ़ महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति एवं मूल्य श्रृंखलाओं के विकास के लिए परस्पर रूप से लाभकारी होगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों में निवेश को प्रोत्साहन, परियोजनाओं की पहचान, तथा महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की खोज, खनन, संवर्धन और प्रसंस्करण में तकनीकी ज्ञान एवं सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाना है।

नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी दोनों देशों ने समझौता किया है। इसका उद्देश्य ऊर्जा भंडारण, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बायोमास/जैव-ऊर्जा के क्षेत्र में सूचना, सर्वोत्तम प्रथाओं और सीखे गए पाठों के आदान-प्रदान तथा क्षमता निर्माण को बढ़ाना है।

दोनों देशों ने लोगों के बीच सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने के लिए भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं। इसका उद्देश्य संस्कृति और ज्ञान-विकास के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को सुदृढ़ करना है।

इस अवसर पर कनाडा ने वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने की घोषणा की है। भारत ने कनाडा के भारतीय महासागर क्षेत्रीय संघ में संवाद भागीदार के रूप में शामिल होने का समर्थन करने की घोषणा की है। दोनों देशों ने भारत-कनाडा संसदीय मैत्री समूह की स्थापना की भी घोषणा की।

दोनों देशों ने भारत-कनाडा मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की फोरम के पुनर्गठन की भी घोषणा की। इससे निजी क्षेत्र में सहभागिता को मजबूती मिलेगी।

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