यरुशलम , फरवरी 26 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इजराइल की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारत और इजराइल ने द्विपक्षीय संबंधों को 'विशेष रणनीतिक साझोदारी ' का दर्जा देने की घोषणा की है और आपसी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द-से-जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता जतायी है।

श्री मोदी की गुरुवार को सम्पन्न हुई दो दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा के दौरान दोनों देशों ने प्रौद्योगिकी के नये उभरते क्षेत्रों, दुर्लभ खनिजों , कृषि , परमाणु ऊर्जा , हथियार प्रणालियों के संयुक्त विकास और उत्पादन, निवेश-व्यापार तथा मानव संसाधन के परस्पर आवागमन के क्षेत्र में परस्पर सहयोग के विस्तार पर सहमति जतायी है।

इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 17 करारों पर हस्ताक्षर किये गये तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए 10 घोषणाएं की गयी। इनमें भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई को इजराइल में भी लागू करने का करार शामिल है।

यात्रा के दूसरे दिन प्रतिनिधि मंडल स्तर की बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी और मेजबान प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में दोनों देशों की मजबूत दोस्ती को परस्पर विश्वास पर आधारित बताते हुए इसे और विस्तृत और सशक्त करने की प्रतिबद्धता जतायी। दोनों देशों ने आतंकवाद को किसी भी रूप में अस्वीकार्य बताते हुए उसका मुकाबला करने के साझा संकल्प को दोहराया है।

संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में श्री मोदी ने अपने वक्तव्य में भारत के हितों की दृष्टि से महत्वपूर्ण पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा कि क्षेत्र में विवाद के मुद्दों का समाधान बातचीत से निकाला जाना चाहिए।

श्री मोदी ने कहा, ''भारत और इजराइल के संबंध गहरे विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, और मानवीय संवेदनाओं की मजबूत आधारशिला पर स्थापित हैं। हमारे रिश्ते समय की हर कसौटी पर खरे उतरे हैं।" उन्होंने कहा, ''आज हमने अपनी समय पर खरी उतरी साझेदारी को " विशेष रणनीतिक साझेदारी " का दर्जा देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह निर्णय दोनों देशों के लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।"प्रधानमंत्री ने भारत-इजराइल सहयोग को आर्थिक वृद्धि, नवाचार और साझा समृद्धि को बढाने वाला बताते हुए कहा कि आज की बैठक में दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग को नई दिशा और तेज़ गति देने पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने आपसी निवेश को बढ़ावा देने के लिए हमने पिछले वर्ष द्विपक्षीय निवेश समझौता किया था और अब " हम शीघ्र ही एक परस्पर लाभदायक मुक्त व्यापार समझौते को भी अंतिम रूप देंगे।"प्रधानमंत्री मोदी ने प्रौद्योगिकी को दोनों देशों की भविष्य की साझेदारी का केंद्र बताते हुए कहा, ' आज हमने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में साझेदारी स्थापित करने का निर्णय लिया है। इससे एआई, क्वांटम और दुर्लभ खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलेगी।"प्रधानमंत्री ने इजरायल में यूपीआई के इस्तेमाल के लिए समझौते पर खुशी जताई और कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी भारत-इजराइल अपने अनुभव साझा करते हुए लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

रक्षा के क्षेत्र में भारत और इजराइल के बीच दशकों पुराने विश्वसनीय सहयोग को रखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा पिछले वर्ष हुए समझौता ज्ञापन से इसमें नए आयाम जुड़ेंगे। श्री मोदी ने कहा, "हम संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन, और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की दिशा में आगे बढ़ेंगे।"उन्होंने कहा कि दोनों देश , "परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को आगे बढ़ाएंगे।"दोनों देशों के बीच कृषि सहयोग के लंबे और सफल इतिहास का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि उनकी इस यात्रा में दोनों पक्षों के कृषि क्षेत्र में इस सहयोग को भविष्योन्मुखी बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा, '' इजरायल के सहयोग से भारत में स्थापित कृषि कार्य संबंधी 'उत्कृष्टता केंद्र' आज हमारी मित्रता के उत्तम उदाहरण हैं। इनकी सफलता देखते हुए, हमने इनकी संख्या 100 तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है"उन्होंने कहा, ''इस दिशा में एक कदम और बढ़ाते हुए हम 'उत्कृष्टता वाले गांव' बनाने पर काम कर रहे हैं। इससे इजरायली टेक्नॉलजी, भारत के गाँव गाँव तक पहुँचेगी, और लाखों किसानों की आय और उत्पादकता में बहुत बढ़ोतरी होगी।"श्री मोदी ने कहा कि दोनों देश भविष्य के लिए तैयार कृषि समाधानों का विकास करेंगे और भारत में " भारत-इजाइल कृषित नवाचार केंद्र" की स्थापना इस सहयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगा।"प्रधानमंत्री ने 2023 में इजराइल के साथ मानव संसाधन के आदान-प्रदान के लिए हुए समझौते का अब वाणिज्य एवं सेवाओं के क्षेत्र में विस्तार किये जाने पर हुई समिति की भी घोषणा की। उन्हेंने कहा कि पिछले समझौते से भारत ने इजरायल के निर्माण और केयर-गिवर (स्वास्थ्य-सुश्रुषा) क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय कामगारों ने अपनी मेहनत, प्रतिबद्धता और कौशल से विश्वास अर्जित किया है।

श्री मोदी ने कहा, " मुझे खुशी है कि इस सहयोग का विस्तार वाणिज्य और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी किया जा रहा है। दोनों देशों के युवाओं, अनुसंधानकर्ताओं और नवाचार में लगे लोगों को जोड़ना हमारी मुख्य प्राथमिकता रहा है।"प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके लिए दोनों देश भारत-इजराइल अकादमिक फोरम की स्थापना करेंगे ।

श्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच आज क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई । दोनों पक्ष क्षेत्रीय संपर्क सुविधाओं को बढ़ावा देते हुए, भारत- पश्चिम एशिया - यूरोप आर्थिक कॉरिडॉर (आई-मेक) और भारत -इजराइल -यूएआई (संयुक्त अरब अमीरात)- यूएसए (अमेरिका)यानी "आई-2-यू-2" पर नई गति से आगे बढ़ेंगे।

श्री मोदी ने कहा, '' भारत और इजरायल की यह स्पष्ट राय है कि आतंकवाद का दुनिया में कोई स्थान नहीं है। किसी भी रूप में, किसी भी तरह के ,आतंकवाद को स्वीकार नहीं किया जा सकता।" प्रधानमंत्री ने दो स्पष्ट रूप से कहा, ' हम कंधे-से-कंधा मिलाकर आतंकवाद और उनके समर्थकों का विरोध करते रहे हैं, और आगे भी करते रहेंगे।'उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता से भारत के सीधे सुरक्षा हित जुड़े हैं। इसलिए भारत शुरू से इस क्षेत्र से मसालों के संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि विकासशील दुनिया और पूरी मानवता की यही पुकार है।

उन्होंने गाजा शांति योजना को भारत का समर्थन दोहराया ।

श्री मोदी ने इस यात्रा में अपने प्रति प्रधानमंत्री नेतन्याहू और इजरायल के लोगों से मिले प्यार , स्नेह , सम्मान के लिए मेजबान प्रधानमंत्री और इजराइल के लोगों का आभार व्यक्त किया।

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