नयी दिल्ली , सितंबर 07 -- भारत, कनाडा और अमेरिका के तीन संस्थानों के वैज्ञानिकों की एक टीम ने क्वांटम एंटैंगलमेंट (क्वांटम-पाश) को लंबे समय तक बनाए रखने का एक तरीका खोजा है। क्वांटम कंप्यूटिंग में प्रकाश-कणों के ध्रुवण की स्थिति विशेष की अवधि बढ़ने के लिए सही समय पर एक 'फ्लिप ऑपरेशन' (स्थित पलटने की क्रिया) लागू करके उसको बनाए रखने में सफलता प्राप्त की है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस शोध से यह पता चलता है कि क्वांटम प्रणालियों में क्रिया के समान ही क्रिया का समय का भी महत्व है। यह तकनीक भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के भीतर मौजूद नाजुक क्वांटम संबंधों को अधिक समय तक बनाए रखने में मदद कर सकती है और इसके लिए हार्डवेयर में किसी बदलाव की आवश्यकता भी नहीं होगी।

क्वांटन-पाश अपने परिवेश के साथ क्रिया-प्रतिक्रिया के बीच जल्दी परिवर्तित या भंग हो जाता है। इस चुनौती का समाधान निकालने के लिए भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के स्वायत्त संस्थान रमण रिसर्च इंस्टीट्यूट (आआरआई), यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी (कनाडा) और लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी (अमेरिका) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने मिलकर काम किया। इस अध्ययन को आंशिक रूप से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभा के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत वित्तीय सहायता दी गयी।

आरआरआई की वरिष्ठ प्रोफेसर और इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाली वैज्ञानिक उर्बसी सिन्हा ने कहा, " मेरे लिए इस शोध के परिणाम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि समय-निर्धारण केवल एक प्रयोगात्मक विवरण नहीं है; यह स्वयं में स्थिति नियंत्रण एक संसाधन हो सकता है।"क्वांटम-पाश एक ऐसी विशेषता है, जिसमें एक कण की अवस्था किसी दूसरे, उससे बहुत दूर स्थित कण की अवस्था से आपस में जुड़ जाती है। क्वांटम प्रणालियों में यह पाश-बंध एक अत्यंत महत्वपूर्ण संसाधन बन जाता है। हालांकि, जब यह पर्यावरण के साथ परस्पर क्रिया करता है, तो पाश धीरे-धीरे कमजोर या समाप्त हो सकता है। इस चुनौती का समाधान खोजने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस शोध परियोजना को स्वीकृत किया है।

शोधकर्ताओं ने पाश-बंध के अचानक समाप्त होने की प्रक्रिया को टालने के लिए एक अनोखी व्यवस्था विकसित की। सबसे पहले उन्होंने अपने ऑप्टिकल सेटअप (प्रकाशिक व्यवस्था) में दो-स्तरीय प्रणाली का अनुकरण किया। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार प्रकाश में पोलराइजेशन ( ध्रुवण ) नामक एक गुण होता है, जो यह बताता है कि प्रकाश की तरंगें किस दिशा में दोलन कर रही हैं।

इस शोध में शामिल वैज्ञानिकों ने अपने क्वांटम-पाश संबंधी शोध में इस मान्यता के साथ अपना प्रयोग किया कि फोटॉन-(प्रकाश कण)-दो अलग-अलग ध्रुवण अवस्थाओं में मौजूद हो सकते हैं। उन्होंने वर्टिकल पोलराइजेशन ( ऊर्ध्वाधर ध्रुवीकरण) को एक्साइटेड स्थिति (संदीप्त की अवस्था ) और हॉरिजाँटल धुवण ( क्षैतिज ध्रुवण) को मूल अवस्था माना। वैज्ञानिकों ने वेवप्लेट नामक एक ऑप्टिकल उपकरण का उपयोग करके वैज्ञानिक ऊर्ध्वाधर ध्रुवण को क्षैतिज ध्रुवण में बदलने को नियंत्रित करने में सफल रहे। इस प्रकार वे प्रकाश कणों (फोटान कणों के ) पास की मूल अवस्था में क्षय की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में सफल हुए। वेवप्लेट प्रकाश के ध्रुवण को बदलने के लिए इस्तेमाल होता है।

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