नई दिल्ली , जून 21 -- भारतीय सेना ने 12 वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देश भर में अलग-अलग स्थानों पर पर योगाभ्यास कर समग्र स्वास्थ्य, मानसिक दृढ़ता और अनुशासित जीवन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

हिमालय की उच्च हिमालयी सीमाओं से लेकर मरुस्थलीय, तटीय, द्वीपीय और क्षेत्रीय सैन्य संरचनाओं तक, सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों, परिवारजनों, एनसीसी कैडेटों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास में भाग लिया।

इस वर्ष की थीम "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" सेना के शारीरिक दक्षता, आंतरिक संतुलन और आजीवन कल्याण के मूल्यों के साथ गहराई से जुड़ी रही। समारोहों में "वसुधैव कुटुम्बकम्" के शाश्वत भारतीय दर्शन को भी प्रमुखता दी गई, जो भारत की विश्व को दी गई स्थायी देन के रूप में योग की सार्वभौमिक स्वीकार्यता को रेखांकित करता है।

सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने असम के तेजपुर में योग कार्यक्रम का नेतृत्व किया। पूर्वी क्षेत्र में सैनिकों के साथ उनकी सहभागिता ने सभी प्रकार के भूभागों और परिस्थितियों में सेना द्वारा शारीरिक क्षमता, दृढ़ता और परिचालन तत्परता पर दिए जा रहे निरंतर बल का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।

राजधानी दिल्ली में सेना उप लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने करियप्पा ग्राउंड में आयोजित योग सत्र में भाग लिया, जिसमें 3,500 से अधिक उत्साही प्रतिभागी शामिल हुए। इनमें महिलाएँ, बच्चे, एनसीसी कैडेट, सेवारत सैनिक, पूर्व सैनिक, परिवारजन और नागरिक सम्मिलित थे। करीब 17 से अधिक देशों के रक्षा अताशे भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जिससे स्वास्थ्य, सामंजस्य और कल्याण के मार्ग के रूप में योग के वैश्विक महत्व और बढ़ती स्वीकृति का प्रतिबिंब दिखाई दिया।

सभी कमानों, सैन्य संरचनाओं और सैन्य स्टेशनों में सैनिकों और उनके परिवारों की सक्रिय भागीदारी के साथ योग सत्र आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों ने विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण परिचालन परिस्थितियों में सेवा देने वाले सैनिकों के लिए शारीरिक सहनशक्ति, मानसिक शक्ति, भावनात्मक स्थिरता और समग्र जीवन-गुणवत्ता को बेहतर बनाने में योग के महत्व को रेखांकित किया।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सेना की राष्ट्रव्यापी भागीदारी ने इस विश्वास को पुनः स्थापित किया कि योग केवल एक व्यायाम पद्धति नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। इन समारोहों ने स्वास्थ्य, सामंजस्य और कल्याण को बढ़ावा देने के साथ-साथ एकता, संतुलन और सार्वभौमिक बंधुत्व के भारत के सभ्यतागत संदेश को आगे बढ़ाने के प्रति सेना की सामूहिक प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित किया।

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