कोझिकोड , मई 26 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है कि भारतीय समाज ने देश का एक और विभाजन रोकने के लिए पर्याप्त शक्ति हासिल कर ली है।
श्री आंबेकर ने मंगलवार को कहा कि आरएसएस आम आदमी के बीच राष्ट्रीय भावना जगाने और व्यक्त करने के लिए पिछले 100 वर्षों से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ केबी हेडगेवार ने यह महसूस किया था कि भारत को जिस लंबे समय तक गुलामी का सामना करना पड़ा, उसे केवल राजनीतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से समाप्त नहीं किया जा सकता था, बल्कि इसके लिए सांस्कृतिक और राष्ट्रीय स्वतंत्रता प्राप्त करना भी आवश्यक था।
श्री आंबेकर के अनुसार, डॉ. हेडगेवार का मानना था कि राष्ट्रीय चरित्र को केवल समाज की मानसिकता में बदलाव लाकर ही बहाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक बदलाव व्यक्तिगत चरित्र-निर्माण की प्रक्रिया से ही संभव है, और समाज में स्थायी परिवर्तन पीढ़ियों तक चलने वाले निरंतर प्रयासों से ही आ सकता है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति को किसी नेता या सरकार द्वारा लोगों पर थोपा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि समाज को विदेशी शिक्षा प्रणालियों द्वारा पैदा की गई अधीनता की मानसिकता से खुद को मुक्त करना होगा।
उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने संघ को केवल अपने जीवनकाल तक सीमित एक परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में देखा था, जो पीढ़ियों तक जारी रहेगा। श्री आंबेकर ने प्रमुख राष्ट्रीय घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि आरएसएस राष्ट्रीय प्रतीकों और मंदिरों के पुनर्निर्माण से जुड़ी पहलों को राष्ट्रीय पुनरुत्थान और सभ्यतागत प्रगति के प्रतीक के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि संगठन ने सार्वजनिक जीवन में राष्ट्र की पहचान और लोकाचार को दर्शाने के लिए लगातार काम किया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता का आंदोलन केवल संघ कार्यकर्ताओं तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसमें पूरे समाज की सक्रिय भागीदारी थी। श्री आंबेकर ने निरंतर राष्ट्रीय प्रगति की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत को अभी भी सामाजिक सद्भाव, परिवारों को मजबूत करने, स्वदेशी प्रथाओं को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण और समाज के नैतिक दायित्वों को पूरा करने जैसे क्षेत्रों में एक लंबा सफर तय करना है।
उन्होंने सभी क्षेत्रों के सामाजिक नेतृत्व से इन लक्ष्यों की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया। श्री आंबेकर ने कहा कि संघ की स्थापना और विकास एक स्पष्ट वैचारिक आधार पर हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत और समाज के सक्रिय सहयोग ने संगठन की सौ साल की यात्रा को मजबूत बनाया है।
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