मऊ , मार्च 22 -- अंतरराष्ट्रीय योग गुरु बाबा रामदेव ने रविवार को कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड के उद्देश्य देश को "शिक्षा की गुलामी" से मुक्त कराना है और थॉमस बबिंगटन मैकाले की शिक्षा प्रणाली से बाहर निकलना समय की आवश्यकता है।

जिला मुख्यालय स्थित लिटिल फ्लावर स्कूल समूह, सिकटिया में आयोजित कार्यक्रम में बाबा रामदेव ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में संस्कारों की कमी है, जबकि भारतीय शिक्षा बोर्ड की प्रणाली छात्रों को ज्ञानवान के साथ-साथ चरित्रवान और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाएगी।

उन्होंने कहा कि यह शिक्षा पद्धति छात्रों को अनावश्यक कोचिंग खर्च से बचाएगी और जाति, वर्ग तथा समुदाय से ऊपर उठकर हर विद्यार्थी को 'क्रिएटर' और दूरदर्शी नागरिक बनाने पर केंद्रित होगी। उन्होंने पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि देश को राजनीतिक स्वतंत्रता तो मिल गई, लेकिन शिक्षा, चिकित्सा और विचारधारा के क्षेत्रों में अभी भी "गुलामी" बनी हुई है।

बाबा रामदेव ने बताया कि वर्तमान में लगभग एक लाख छात्र इस बोर्ड से जुड़े हैं और अगले 10 वर्षों में इसे 5 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने दावा किया कि इस बोर्ड से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र समाज विरोधी गतिविधियों से दूर रहेंगे।

कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन एमपी सिंह ने भी लोगों से संवाद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिका परिषद अध्यक्ष अरशद जमाल ने की, जबकि संयोजक मुरलीधर यादव ने बाबा रामदेव के प्रथम मऊ आगमन पर उनका स्वागत किया।

बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड आधुनिक और पारंपरिक शिक्षा का समन्वय है, जिसमें संस्कृत के साथ गणित, विज्ञान सहित सभी आवश्यक विषय शामिल हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत किसी भी देश के युद्ध का समर्थन नहीं करता और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण को और सशक्त बनाया जाएगा।

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