कोच्चि , नवंबर 07 -- केरल में कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. के.के. साजू ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय विमानन उद्योग बेड़े के विस्तार, बढ़ते यात्री यातायात और बुनियादी ढाँचे व कौशल विकास में रणनीतिक निवेश के कारण परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर रहा है।

प्रो. साजू ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले तीस वर्षों में भारतीय विमानन ने उल्लेखनीय वृद्धि और चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020, अपने दोहरे प्रमुख कार्यक्रमों के साथ केवल कॉकपिट और केबिन भूमिकाओं से परे करियर के रास्ते बनाकर इस अंतर को पाटने में मदद कर सकती है।

उन्होंने इस क्षेत्र की तीन दशक की यात्रा पर बोलते हुए कहा कि भारतीय विमानन ने तीव्र विकास और उथल-पुथल भरे उतार-चढ़ाव दोनों का अनुभव किया है।

उन्होंने कहा कि ईस्ट वेस्ट एयरलाइंस, जेट एयरवेज, किंगफिशर एयरलाइंस और गो एयर सहित कई एयरलाइन्स ने तेज़ी से तरक्की की लेकिन अंततः वित्तीय या प्रतिस्पर्धी दबावों के कारण ध्वस्त हो गईं। उन्होंने कहा कि आज, एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर और स्पाइसजेट के नेतृत्व में उद्योग में पुनरुत्थान हो रहा है, जो अपने बेड़े का विस्तार कर रहे हैं, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मार्गों का विस्तार कर रहे हैं और रणनीतिक साझेदारियाँ बना रहे हैं।

प्रो़ साजू ने इस गति के बावजूद कौशल की कमी पर प्रकाश डाला, जहाँ अधिकांश एयरलाइंस आंतरिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से स्नातकों को प्राथमिकता देती हैं और 10 प्रतिशत से भी कम बाहरी विमानन-प्रमाणित उम्मीदवारों को स्वीकार करती हैं।

प्रो. साजू ने कहा कि पिछले तीन दशकों में भारतीय विमानन क्षेत्र ने उल्लेखनीय विस्तार के साथ-साथ उथल-पुथल के दौर का भी अनुभव किया है, लेकिन एनईपी 2020 आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती है।

प्रो. साजू ने भारत की वैश्विक विमानन स्थिति को मज़बूत करने और दीर्घकालिक विकास को बनाए रखने के लिए लक्षित प्रशिक्षण, मज़बूत उद्योग-अकादमिक साझेदारी और अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों को आवश्यक उपाय बताया।

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