जोधपुर , मार्च 20 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने भारतीय संस्कृति में नव वर्ष को केवल कैलेंडर परिवर्तन नहीं, बल्कि सृष्टि के नवचक्र के आरंभ का प्रतीक बताते हुए कहा है कि हमारी वैदिक परंपराएं प्रकृति, समाज और मानव जीवन के संतुलन का संदेश देती हैं, जिन्हें सहेजना और आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व है।
श्री बागडे सृष्टि नव वर्ष 2083 के पावन अवसर पर शुक्रवार को मारवाड़ अश्व अनुसंधान केंद्र, माणकलाव स्थित आशुसप्ति स्टड फार्म में आयोजित वैदिक परंपरा के अनुरुप यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पर्यावरण शुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक एकता का प्रभावी माध्यम है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में आधुनिकता के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है। भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक रीति-रिवाज और लोकाचार हमारी पहचान हैं, जो समाज को दिशा प्रदान करते हैं। इस अवसर पर श्री बागडे में आशुसप्ति स्टड फार्म के विभिन्न नस्लों के अश्वों का भी अवलोकन किया।
कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा सहित आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं श्रद्धालुओं ने भाग लेकर राष्ट्र एवं समाज की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
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