नयी दिल्ली , अक्टूबर 10 -- भारतीय नौसेना के लिए बनाये जा रहे अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत 'श्रेयस' (यार्ड 3040) का शनिवार को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) में जलावतरण किया गया।
पोत का जलावतरण श्रीमती रेमन कोचर ने नौसेना के उप प्रमुख, वाइस एडमिरल अजय कोचर की उपस्थिति में किया।
'श्रेयस' स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया जा रहा अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत है। इसका निर्माण भारतीय नौसेना की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इन अगली पीढ़ी के गश्ती पोतों का निर्माण एक साथ दो शिपयार्ड में किया जा रहा है। इनमें गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल), गोवा और जीआरएसई, कोलकाता शामिल हैं। ये पोत मौजूदा अपतटीय गश्ती पोतों की क्षमता बढ़ाएंगे और कई तरह के समुद्री अभियानों में इस्तेमाल किये जायेंगे। इनका उपयोग समुद्री निगरानी, खोज और बचाव अभियान, समुद्र में स्थित महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) तथा समुद्री डकैती रोधी अभियानों में किया जायेगा।
'श्रेयस' नाम संस्कृत शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ 'श्रेष्ठ' या 'सबसे उत्कृष्ट' है। इस पोत का जलावतरण सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप है।
कार्यक्रम में नौसेना, रक्षा मंत्रालय, जीआरएसई और उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
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