वाराणसी , जुलाई 31 -- देश में स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास तथा 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) और भारतीय नौसेना के बीच 30 जुलाई को नई दिल्ली स्थित नौसेना मुख्यालय में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये।

एमओयू पर भारतीय नौसेना के कंट्रोलर ऑफ मैटेरियल (सीओएम) वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार, एवीएसएम, वीएसएम तथा आईआईटी (बीएचयू) के डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. राजेश कुमार ने हस्ताक्षर किये। इस अवसर पर आईआईटी (बीएचयू) के प्रोफेसर इंचार्ज (आउटरीच एंड इंडस्ट्री रिलेशंस) प्रो. सुशांत कुमार श्रीवास्तव तथा सलाहकार (आउटरीच एंड इंडस्ट्री रिलेशंस) डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे।

यह समझौता अनुसंधान एवं विकास, तकनीकी नवाचार, शैक्षणिक सहयोग, संकाय एवं विद्यार्थियों के आदान-प्रदान तथा क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में दोनों संस्थानों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का आधार तैयार करेगा। इसका उद्देश्य भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप अत्याधुनिक स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का विकास करना है।

समझौते के तहत उन्नत हथियार एवं सेंसर प्रौद्योगिकी, पानी के भीतर वस्तुओं की पहचान, रडार प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, उन्नत सामग्री, समुद्री इंजीनियरिंग, नौसैनिक अवसंरचना तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास किया जाएगा।

वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार ने कहा कि यह एमओयू भारतीय नौसेना और देश के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईआईटी (बीएचयू) के साथ संयुक्त अनुसंधान से समुद्री सुरक्षा की भविष्य की चुनौतियों के प्रभावी समाधान विकसित होंगे तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी।

आईआईटी (बीएचयू) के डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि संस्थान की बहुविषयक अनुसंधान क्षमता भारतीय नौसेना के लिए नवीन तकनीकी समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह साझेदारी अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश के स्वदेशी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ बनाएगी।

प्रो. सुशांत कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यह समझौता शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और रणनीतिक संगठनों के बीच सहयोग को नई दिशा देगा। इससे शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा आईआईटी (बीएचयू) के स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय महत्व की प्रौद्योगिकियों के विकास में योगदान देने के नए अवसर प्राप्त होंगे।

एमओयू के तहत संयुक्त कार्यशालाओं एवं सेमिनारों का आयोजन, सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं, आईआईटी (बीएचयू) के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स के साथ सहभागिता तथा भारतीय नौसेना के अनुसंधान प्रतिष्ठानों के साथ अनुसंधान सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि भविष्य की समुद्री एवं रक्षा चुनौतियों के लिए नवाचार आधारित समाधान विकसित किये जा सकें।

यह समझौता प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और दोनों संस्थानों के बीच अनुसंधान, नवाचार तथा रणनीतिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग का मजबूत आधार बनेगा।

आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि देश के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों और रणनीतिक राष्ट्रीय संगठनों के बीच इस प्रकार की साझेदारी विकसित भारत तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय नौसेना के साथ यह सहयोग नवाचार को नई गति देगा, स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास को सशक्त बनाएगा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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