रीवा , सितंबर 19 -- भारतीय ज्ञान परंपरा व्यक्ति को परिवार, समाज और राष्ट्र से जोड़ते हुए कर्तव्यनिष्ठा, सेवा भाव और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करती है। यह बात शासकीय कमला राजा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, ग्वालियर के समाजशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वासुदेव सिंह जादौन ने शनिवार को यहां कही।
डॉ. जादौन प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय, रीवा के समाजशास्त्र विभाग द्वारा 'भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित सामाजिक चिंतन' विषय पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने एकात्म बोध की अवधारणा समझाते हुए कहा कि व्यक्ति जब स्वयं को परिवार, समाज और राष्ट्र से जोड़ता है, तभी वास्तविक एकात्म भाव विकसित होता है। उन्होंने व्यष्टि से समष्टि की ओर बढ़ने की आवश्यकता बताते हुए कर्तव्यनिष्ठा, सेवा भाव और सामाजिक जिम्मेदारी को जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने भौतिक एवं आध्यात्मिक पक्षों के बीच संतुलन को आवश्यक बताते हुए स्वधर्म तथा गीता में वर्णित सात्त्विक, राजसिक एवं तामसिक गुणों की व्याख्या की।
उन्होंने सामाजिक समरसता को समाज के सभी वर्गों के साथ समान भाव से रहने की भावना बताते हुए भावनात्मक जुड़ाव, भेदभाव एवं अस्पृश्यता से मुक्ति, विविधता के सम्मान तथा अंत्योदय की भावना को इसके प्रमुख आधार बताया।
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