नयी दिल्ली , जून 12 -- भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मिशन ने शुक्रवार को यहां देश में ही विकसित एआई मार्डन 'वार्या' जारी किया जो टेक्सट (लिखित पाठ) के आधार पर वीडियो-कहानी तैयार करने में सहायक है। वार्या को काफी किफायती , अधिक तीव्र गति से गुणवत्तापूर्ण कार्य संपादित करने में समक्षम एआई मॉडल बताया गया है।
इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय (मेइटी) की एक विज्ञप्ति के अनुसार एआई मिशन के सहयोग से एवीटीएएआर.एआई (अवतार.एआई) द्वारा विकसित 'वार्या' के बारे में दावा है कि यह वीडियो निर्माण को 50 चरणों से घटाकर 4 चरणों में पूरा कर देता है। दावा है कि वार्या अपनी तरह के अन्य एआई मॉडलों की तुलना में वीडियो-कथा बनाने के काम को दस गुना अधिक कुशल बना देता है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि वार्या की मदद से शिक्षा से लेकर ई-कॉमर्स तक - तमाम क्षेत्रों के लिए किफायती एआई वीडियो निर्माण किये जा सकते हैं और यह स्मार्ट प्रॉम्प्टिंग के माध्यम से टेक्स्ट (लिखित पाठ को) वीडियो में बदलने की अद्भुत क्षमता प्रदान करता है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन और अवतार की नेतृत्व टीम की उपस्थिति में देश के अगली पीढ़ी के उपयोगकर्ताओं के लिए 'वार्या' के शुभारंभ की घोषणा की गयी। इसे भारत के विविध सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है। इस मॉडल का उद्देश्य भारत के विभिन्न क्षेत्रों, त्योहारों, समुदायों, खान-पान, पहनावे, सार्वजनिक स्थानों और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े सांस्कृतिक रूप से समृद्ध दृश्य प्रस्तुतियां तैयार करना और उन्हें समझना है।
विज्ञप्ति में कहा गया है, " चाहे गांव की कक्षा में शिक्षक द्वारा दृश्य पाठ तैयार करना हो, एमएसएमई द्वारा उत्पाद विज्ञापन बनाना हो, या वीडियो के माध्यम से सार्वजनिक जानकारी प्राप्त करने वाला नागरिक हो, 'वार्या' का उद्देश्य एक सरल विचार को एक मार्मिक कहानी में बदलना है।'इंडिया एआई मिशन द्वारा स्वदेशी बुनियादी एआई क्षमताओं के निर्माण के लिए कई कंपनियों को सरकारी मदद के लिए चुना गया था और उनमें अवतार भी थी । इस कंपनी को रियायती दर पर राष्ट्रीय एआई कंप्यूटिंग सुविधाएं दिलायी गयीं जिससे यह इस तरह का शोध कर सकी जिससे 'वार्या' का निर्माण संभव हुआ।
मंत्रालय का कहना है कि किसी बात या कार्य को सीखने, वाणिज्य प्रस्तुति , संवाद और कहानी प्रस्तुत करने में वीडियो तेजी से प्राथमिक माध्यम बनता जा रहा है। इसे देखते हुए 'वार्या' जैसे टूल का महत्व भी बढ़ा है।
उद्घाटन समारोह में मेइटी सचिव श्री कृष्णन ने वार्या को महत्वपूर्ण उपलबधि बताते हुए कहा, " 'वार्या' उस प्रकार के अनुसंधान-आधारित क्षमता निर्माण का प्रतिनिधित्व करता है जिसे हम सक्षम बनाना चाहते हैं। यह अवसर स्वदेशी एआई क्षमताओं के निर्माण और एक जीवंत डीप-टेक इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। "मेईटी सचिव ने कहा कि सरकार फाउंडेशनल मॉडलों के लिए रणनीतिक समर्थन के माध्यम से बड़े पैमाने पर नवाचार को सक्षम बना रही है और इससे अगली पीढ़ी के एआई समाधानों के लिए आधारशिला तैयार हो रही हैं। उन्होंने कहा, ' हम भारत की एआई क्षमताओं को और मजबूत करने और विश्व स्तरीय तथा व्यापक जनसंख्या तक सुलभ किफायती नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं।'अवतार (एवीएटीएएआर) 'वार्या' की मॉडल संरचना, डिस्टिलेशन कार्यप्रणाली और बेंचमार्क का विवरण देने वाली एक तकनीकी रिपोर्ट भी प्रकाशित करेगा।
अवतार के सीईओ और सह-संस्थापक श्रावंत अलुरु ने कहा, "भारत में एआई के अवसर केवल सबसे बड़े मॉडलों द्वारा ही परिभाषित नहीं होंगे। ये सबसे कुशल मॉडलों द्वारा भी परिभाषित होंगे। 'वार्या' यह दर्शाता है कि अत्याधुनिक वीडियो एआई को कहीं अधिक कुशल और सुलभ बनाया जा सकता है। 'उन्होंने कहा कि 1.4 अरब लोगों के देश के लिए किफायत कोई विशेषता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता है। कंपनी का मानना है कि अगली एक अरब कहानियां, पाठ, विज्ञापन, सेवाएं और अनुभव एआई के माध्यम से निर्मित की जाएंगी और ये क्षमताएं कुछ ही लोगों के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए उपलब्ध होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि "किफायती एआई समावेशी एआई है, और अवतार 'वार्या' के साथ जो कुछ बना रहा है वह महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चर्चा को केवल एआई क्षमता से हटाकर एआई की सुलभता की ओर ले जाता है। भारत के पास प्रतिभा, बहुत बड़ा बाजार और कल्पनाशीलता है, जिससे वह बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए एआई उत्पाद बना सकता है। 'वार्या' इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कैसे कर सकती हैं।
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