रायपुर , अप्रैल 30 -- छत्तीसगढ़ में निर्माणाधीन भारतमाला परियोजना से जुड़े मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं के मामले ने अब व्यापक रूप ले लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस प्रकरण में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर संभावित मिलीभगत की जांच तेज कर दी है।

प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि परियोजना प्रभावित क्षेत्रों में कुछ प्रभावशाली लोगों ने अपने परिजनों के नाम पर भूमि क्रय की और बाद में उसी भूमि पर मुआवजा प्राप्त किया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार मुआवजा प्रकरण तैयार करने में राजस्व अमले की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पटवारी और राजस्व निरीक्षकों द्वारा तैयार प्रकरणों को अनुमोदन के लिए कलेक्टरों को भेजा गया, जिसके बाद मुआवजा राशि जारी की गई। 27 अप्रैल को ईडी द्वारा संदिग्ध व्यक्तियों के ठिकानों पर की गई कार्रवाई में ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जो कुछ राजनीतिक हस्तियों से संभावित संबंधों की ओर इशारा करते हैं।

सूत्रों के मुताबिक 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिनमें से लगभग आधा दर्जन अधिकारियों पर कमीशन लेने के आरोप सामने आए हैं। रायपुर, कोरबा, धमतरी, बिलासपुर और दुर्ग सहित कुछ जिलों के पूर्व कलेक्टर जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने भी इन अधिकारियों का उल्लेख किया है।

इधर, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने राज्य सरकार के निर्देश पर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच पूरी कर ली है। इस सिलसिले में तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें राजस्व कर्मचारी, प्रॉपर्टी डीलर और कुछ लाभार्थी किसान भी शामिल हैं। एजेंसी जल्द ही न्यायालय में अंतिम चालान प्रस्तुत करने की तैयारी में है।

ईओडब्ल्यू की जांच के आधार पर ही ईडी ने मामला दर्ज कर अपनी कार्रवाई शुरू की है। हालांकि, ईडी विशेष रूप से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषकर आईएएस स्तर के अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र रूप से पड़ताल कर रही है। जांच में रायपुर के बाद कोरबा जिले में सबसे अधिक गड़बड़ियां सामने आई हैं, जहां मुआवजा वितरण में कथित तौर पर व्यापक अनियमितताएं पाई गई हैं।

इस पूरे मामले में पूर्व मंत्री, वर्तमान और पूर्व विधायक सहित विभिन्न राजनीतिक दलों-भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों से जुड़े नेताओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है। साथ ही, करीब दो दर्जन प्रॉपर्टी डीलर और बिचौलियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनके माध्यम से कथित लेनदेन और नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। कुछ अधिकारियों के परिजनों की संलिप्तता की भी जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है।

फिलहाल, जांच एजेंसियां दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले की परतें खोलने में जुटी हैं और आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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