नयी दिल्ली , मई 31 -- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के विधानसभा क्षेत्र शालीमार बाग में लगभग 200 मकानों को ध्वस्त किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसका असली चरित्र गरीब विरोधी और जनविरोधी है।
डॉ नरेश ने रविवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि चुनाव के समय गरीबों को सपने दिखाने वाली भाजपा सत्ता में आते ही उनके सिर से छत छीनने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, वे कोई भू-माफिया या अवैध कब्जाधारी नहीं थे, बल्कि दशकों से वहां रह रहे मेहनतकश परिवार थे जिन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर अपने घर बनाए थे।
यह क्षेत्र शालीमार गांव से सटी हुई पुरानी बसावट का हिस्सा है। भाजपा सरकार स्वयं 1511 कॉलोनियों को नियमित करने का दावा करती रही है और इस क्षेत्र का नाम भी उन कॉलोनियों में शामिल बताया गया था। यदि सरकार वास्तव में लोगों को मालिकाना हक देना चाहती थी तो आज ये परिवार सड़क पर क्यों हैं?डॉ नरेश ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई है कि सभी प्रभावित परिवारों को तत्काल सम्मानजनक पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। यदि सरकार पुनर्वास देने में असमर्थ है तो प्रत्येक प्रभावित परिवार को उसके मकान और भूमि का वर्तमान बाज़ार मूल्य निर्धारित कर उसके अनुरूप पूर्ण मुआवज़ा दिया जाए, ताकि वे अपने लिए नया आवास खरीद सकें और सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
डॉ. नरेश ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने न्यायालय में भी प्रभावित परिवारों का पक्ष मजबूती से नहीं रखा। सरकार की लापरवाही और उदासीनता के कारण आज सैकड़ों परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं। इस पूरे घटनाक्रम की सीधी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर है।
उन्होंने कहा कि भाजपा को गरीबों को उजाड़ने से पहले कांग्रेस का इतिहास पढ़ना चाहिए। सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस सरकारों ने वर्ष 1990 तक दिल्ली की 45 पुनर्वास कॉलोनियों में 80 गज के 3,701 प्लॉट, 40 गज के 895 प्लॉट तथा 25 गज के 2,14,204 प्लॉट आवंटित किए थे। कुल मिलाकर 2,18,800 से अधिक गरीब परिवारों को बसाने का कार्य किया गया। बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित की सरकार ने 20 जून 2013 के आदेश द्वारा इन मकानों को फ्रीहोल्ड कर पूर्ण स्वामित्व का अधिकार भी प्रदान किया।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि वर्ष 1990 से 2006 के बीच द्वारका, नरेला, बवाना, बक्करवाला, बापरौला सहित अनेक नई पुनर्वास कॉलोनियां विकसित की गईं, जिनमें लगभग 92 हजार अतिरिक्त झुग्गीवासियों को प्लॉट आवंटित किए गए। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने यह नीति लागू की कि झुग्गीवासियों को उनके वर्तमान निवास स्थान या उसके आसपास ही बहुमंजिला फ्लैट बनाकर बसाया जाए। कालकाजी और अशोक विहार में शुरू की गई परियोजनाएं इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम थीं।
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