अमृतसर , अगस्त 30 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) के प्रवक्ता प्रो. सरचंद सिंह ख्याला ने रविवार को कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर कर्मचारियों से जुड़े उच्च न्यायालय के सभी फैसलों को हूबहू लागू किया जाएगा।
उन्होंने हड़ताल पर गये कर्मचारियों की सूचियां मांगे जाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी को लेकर मान सरकार पर निशाना साधा।
प्रो. ख्याला ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों का समाधान बातचीत की मेज पर करने के बजाय प्रशासनिक दबाव के जरिए उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों पहले ही कर्मचारियों और पेंशनरों के समर्थन में मजबूती से खड़े रहने की घोषणा कर चुके हैं और हड़ताल में शामिल कर्मचारियों को जारी कारण बताओ नोटिसों की कड़ी निंदा कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार को वास्तव में आम लोगों को हो रही परेशानी की चिंता है तो उसे पहले यह बताना चाहिए कि कर्मचारियों को उनके जायज अधिकार देने में देरी क्यों की गयी। अदालत के आदेशों के बावजूद मामले को बातचीत और सार्थक समाधान की दिशा में क्यों नहीं ले जाया गया तथा कर्मचारियों के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखने के लिए बातचीत के रास्ते क्यों बंद किये जा रहे हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जो सरकार अपने कर्मचारियों की जायज मांगों का समाधान नहीं कर सकी, वह अब धमकियां देने, गैरहाजिर कर्मचारियों की सूचियां बनाने और दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी को प्रशासन चलाने का तरीका समझ रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक सरकार का रवैया नहीं बल्कि अहंकार और प्रशासनिक विफलता का संकेत बताया।
उन्होंने कहा, ''कर्मचारियों की सूचियां बनाने से सरकार की विफलताओं की सूची नहीं मिटेगी। धमकियों से डीए का बकाया खत्म नहीं होगा और सरकार अदालत के आदेशों का पालन करने की अपनी जिम्मेदारी से भी नहीं बच सकती।''प्रो ख्याला ने कहा कि कर्मचारियों का लंबित महंगाई भत्ता (डीए) और अन्य बकाया केवल किसी कर्मचारी संगठन की मांग नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा और मेहनत से अर्जित उनका अधिकार है। यह हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार कर्मचारियों को अपने परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताती है और दूसरी ओर हड़ताल करने पर कार्रवाई की धमकी देती है। यह सरकार का दोहरा रवैया है। यदि कर्मचारी वास्तव में सरकार के परिवार का हिस्सा हैं तो उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए।
भाजपा नेता ने कहा कि जिन कर्मचारियों को आज 'गैरहाजिर' बताकर कार्रवाई की धमकी दी जा रही है, वही वर्षों से पंजाब का सरकारी तंत्र चला रहे हैं और आम लोगों को आवश्यक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। अपने ही कर्मचारियों को विरोधी समझकर कोई भी सरकार जनहितैषी होने का दावा नहीं कर सकती। उन्होंने मान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारियों को धमकाकर चुप कराने का भ्रम नहीं पालना चाहिए। लाखों कर्मचारी और पेंशनर यदि समान मुद्दों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठा रहे हैं तो उनकी सामूहिक चिंता को केवल 'अनुशासनहीनता' बताकर खारिज करना वास्तविकता से मुंह मोड़ना होगा।
प्रो ख्याला ने कहा कि सरकार जितना प्रशासनिक दबाव बढ़ाएगी, उसके और कर्मचारियों के बीच टकराव उतना ही बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और सरकारी कर्मचारी राज्य के लगभग हर गांव, शहर और परिवार से सीधे जुड़े हैं। उनके जायज अधिकारों को दबाने की कोशिश आम आदमी पार्टी को भारी राजनीतिक कीमत चुकाने पर मजबूर कर सकती है। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार के पास अब दो रास्ते हैं,-टकराव की नीति छोड़कर कर्मचारियों के साथ तत्काल सार्थक बातचीत शुरू करे और उनकी जायज मांगों का समाधान करे या टकराव का रास्ता अपनाए, जो पंजाब के हित में नहीं होगा।
प्रो ख्याला ने कहा कि मान सरकार को सत्ता के अहंकार को छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए और कर्मचारियों को डराने के बजाय उनके जायज अधिकार देने चाहिए। अन्यथा इस टकराव के परिणाम केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेंगे और सरकार को इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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