जयपुर, 17 सितम्बर (वार्ता) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि नगरीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पार्षदों को पुलिस कार्रवाई का भय दिखाकर डरा धमकाते हुए प्रलोभन दे रही है।
श्री गहलोत ने गुरुवार को यहां पत्रकारों से कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा होना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन राज्य में एकतरफा पुलिस कार्रवाई की जा रही है, पार्षदों को डराया-धमकाया जा रहा है और मंत्रियों को बिठाकर डेढ़ करोड़, दो करोड़ एवं ढाई करोड़ रुपये तक के भारी प्रलोभन दिये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में भाजपा के पास पैसों की कमी नहीं है। देशभर में निर्वाचित सरकारों को गिराने के लिए धनबल का जो तमाशा किया गया, 'जैसा देश वैसा वेश' की तर्ज पर वही प्रेरणा अब नीचे जिलों और ब्लॉकों तक पहुंच चुकी है।
श्री गहलोत ने तीखी आलोचना करते हुए कहा कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग, मनमाना परिसीमन, मुख्यमंत्री के स्वयं के रोड शो और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की निगरानी के बावजूद 64 प्रतिशत वोट भाजपा के खिलाफ पड़े हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निकाय चुनावों में भाजपा की झूठी जीत की बधाई देना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस कारण अब राज्य सरकार पर किसी भी तरह से ज्यादा से ज्यादा बोर्ड बनाने का भारी दबाव है।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भरतपुर, केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के अजमेर, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के अलवर, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जोधपुर, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौर के पाली और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह क्षेत्र झालावाड़ में भी भाजपा बहुमत हासिल करने में विफल रही है।
श्री गहलोत ने कहा कि राज्य में भाजपा और कांग्रेस के वोटों का अंतर मात्र 0.94 प्रतिशत (भाजपा 35.19 बनाम कांग्रेस 34.25) रहा, लेकिन सीटों का फासला 5.5 प्रतिशत हो गया । जोधपुर नगर निगम में कांग्रेस को भाजपा से 14 हजार 282 वोट ज्यादा मिलने के बावजूद गलत परिसीमन के कारण दोनों को बराबर (44-44) सीटें मिलीं। जोधपुर के वार्ड संख्या 99 में कांग्रेस समर्थक चार वार्डों को मिलाकर एक वार्ड बनाया गया, जबकि भाजपा समर्थक क्षेत्रों में एक वार्ड को दो-तीन भागों में बांटा गया। जयपुर में भी कांग्रेस को 14 हजार 620 मत अधिक मिलने के बावजूद परिसीमन में हेरफेर के कारण भाजपा अधिक वार्ड जीत पायी।
चुनाव परिणामों का विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य के कुल 10 हजार 244 वार्डों में से भाजपा 6,065 वार्डों (59 प्रतिशत) में चुनाव हारी है। इसके अलावा, राज्य के 309 निकायों में से 223 (72 प्रतिशत) निकायों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। 10 नगर निगमों में से भाजपा केवल चार (भीलवाड़ा, जयपुर, कोटा, उदयपुर) में ही बहुमत पा सकी, जो पिछले चुनाव की तुलना में भी एक निगम कम है।
श्री गहलोत ने कहा कि हार स्वीकार करने के बजाय मुख्यमंत्री कार्यालय से एक आईएएस अधिकारी सीधे कलेक्टर्स और एसडीएम पर दबाव बना रहे हैं। झुंझुनूं (मंडावा), नीमराना, टोंक, जोधपुर, कोटपूतली-बहरोड़, सीकर, धौलपुर, जालौर, अजमेर और बूंदी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस के माध्यम से निर्दलीय एवं कांग्रेस पार्षदों को डराने-धमकाने, बाड़ेबंदी पर दबिश देने और परिजनों पर दबाव बनाने की घटनाएं सामने आयी हैं।
उन्होंने कहा कि खैरथल में निर्वाचित पार्षद विक्रम चौधरी को तोड़कर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा दिल्ली में पार्टी में शामिल कराया जाना यह साबित करता है कि यह तोड़फोड़ अभियान भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की देखरेख में चल रहा है।
श्री गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा एक-एक पार्षद को दो-दो करोड़ रुपये बांटकर भ्रष्टाचार का नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है। जो लोग करोड़ों रुपये खर्च करके अध्यक्ष या महापौर बनेंगे, वे जनता की सेवा करने के बजाय अपनी लागत वसूलने का काम करेंगे, जिससे आम नागरिक की जेब पर सीधा डाका पड़ेगा।
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