तिरुवनंतपुरम , मार्च 28 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनाव आयोग के एक दस्तावेज पर भाजपा की सील दिखने के विवादास्पद मामले पर हमला तेज कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि यह घटना महज कोई दुर्घटना नहीं है, बल्कि पार्टी की छवि खराब करने के उद्देश्य से रची गयी बड़ी साजिश का हिस्सा है।
भाजपा के प्रदेश महासचिव एडवोकेट एस. सुरेश ने दावा किया कि इस पूरे प्रकरण को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से जुड़े व्यक्तियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है।
उन्होंने विशेष रूप से निलंबित अधिकारी जैसल पी अजीज का नाम लिया और आरोप लगाया कि इस अधिकारी के केरल में सत्तारूढ़ माकपा के साथ करीबी संबंध हैं।
श्री सुरेश के अनुसार, निलंबन का समय गंभीर संदेह पैदा करता है, जो विवाद के सार्वजनिक होने के बाद हुआ। उन्होंने कहा कि यह मूल कारण को सामने लाने के बजाय राजनीतिक नुकसान को रोकने की कोशिश की ओर इशारा करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी सचिवालय के भीतर एनजीओ यूनियन में सक्रिय व्यक्ति है। हाल ही में सरकारी सेवा में आया था। इसके बावजूद उन्हें कथित तौर पर एसएफआई और डीवाईएफआई जैसे वामपंथी संगठनों से उनकी निकटता के कारण चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था।
श्री सुरेश ने तर्क दिया कि यह चुनावों की देखरेख करने वाले संवेदनशील संस्थानों के भीतर राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों को बिठाने का जानबूझकर किये गये प्रयास को दर्शाता है।
इस घटना को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए सीधा खतरा बताते हुए भाजपा नेता ने कहा कि चुनाव आयोग के आधिकारिक दस्तावेज पर किसी पार्टी की सील की उपस्थिति को महज प्रक्रियात्मक चूक मानकर खारिज नहीं किया जा सकता।
इसके बजाय उन्होंने इसे भाजपा की विश्वसनीयता को कम करने के लिए किया गया सोचा-समझा कदम बताया, जो वर्तमान में केंद्र सरकार का नेतृत्व कर रही है।
श्री सुरेश ने यह भी आरोप लगाया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। उन्होंने नेमोम चुनाव क्षेत्र में इसी तरह की अनियमितताओं की ओर इशारा किया। उन्होंने दावा किया कि ज्ञात वामपंथी झुकाव वाले अधिकारियों को रणनीतिक रूप से चुनाव से जुड़ी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में तैनात किया जा रहा है।
विशेष रूप से उन्होंने चुनाव ड्यूटी के लिए श्रम विभाग के कर्मियों को सौंपे जाने पर सवाल उठाये और आरोप लगाया कि ऐसी नियुक्तियों को केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी प्रभावित कर रहे हैं।
श्री सुरेश ने श्री शिवनकुट्टी पर चुनाव प्रचार के लिए सरकारी वाहनों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया और कहा कि इन शिकायतों पर राज्य चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
उन्होंने माकपा, कांग्रेस और एसडीपीआई के बीच, साथ ही चुनाव आयोग के कुछ वर्गों और राजनीतिक दिग्गजों के बीच गुप्त समझौतों का आरोप लगाया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे घटनाक्रमों का भाजपा की चुनावी संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इन घटनाक्रमों को 'अत्यंत गंभीर' बताते हुए भाजपा ने औपचारिक रूप से केंद्रीय चुनाव आयोग से संपर्क किया है और इस घटना की व्यापक उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
पार्टी ने उन व्यक्तियों को तत्काल उन पदों से हटाने की भी मांग की है, जिनका राजनीतिक झुकाव चुनाव के संचालन को प्रभावित कर सकता है। पार्टी ने चेतावनी दी कि कार्रवाई करने में विफल रहने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का भरोसा कम हो सकता है।
इस विवाद ने केरल में राजनीतिक तनाव तेज कर दिया है, जिसमें भाजपा इस बात पर जोर दे रही है कि चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए सीलिंग घटना के पीछे की सच्चाई सामने लायी जानी चाहिए।
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