कोलकाता , मार्च 03 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को छह राज्यों की नौ राज्यसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए। इसमें पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा को पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है।

पार्टी के इस निर्णय से इस बात का स्पष्ट संकेत मिलता है कि केंद्रीय नेतृत्व ने ऊपरी सदन के लिए उम्मीदवार का चुनाव करते वक्त राज्य इकाई की राय को ज्यादा महत्व देने का फैसला किया है।

श्री सिन्हा पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और बाद में उन्होंने राष्ट्रीय सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं। हालांकि, पिछले कुछ सालों से उनके पास कोई संगठनात्मक पद नहीं था। जब उन्हें राष्ट्रीय सचिव के पद से हटाकर उनकी जगह अनुपम हाजरा को लाया गया था, तब उन्होंने पार्टी में बने रहने के बावजूद नेतृत्व के इस निर्णय पर खुलेआम प्रश्नचिह्न लगाये थे।

शमिक भट्टाचार्य के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद राज्य में उनका राजनीतिक कद फिर से बढ़ने लगा। पिछले कुछ महीनों के दौरान श्री सिन्हा को 'परिवर्तन संकल्प यात्रा' की कई रैलियों में मुख्य वक्ता के रूप में भेजा गया था। अब भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में उनके नाम की औपचारिक घोषणा के साथ ही श्री सिन्हा पहली बार संसद में कदम रखने के लिए तैयार हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या के हिसाब से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से तृणमूल कांग्रेस के चार और भाजपा के एक उम्मीदवार के जीतने की उम्मीद है। तृणमूल पहले ही अपने चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर चुकी है। भाजपा ने केवल एक नाम दिया है। इस कारण, अगर आखिरी वक्त पर कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, तो श्री सिन्हा का निर्विरोध चुना जाना तय है।

श्री सिन्हा ने अपनी उम्मीदवारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसके समय का एक खास संदेश है। उन्होंने कहा, "होली बुराई के अंत और अच्छाई के आरंभ की प्रतीक है। आज हमारे कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश गया है कि संगठन हर किसी पर नजर रखता है और किसी को भूला नहीं है।"उन्होंने आगे कहा कि उनकी उम्मीदवारी उन लोगों के लिए एक विशेष संदेश है जो अक्सर पार्टी के भीतर खुद को अनदेखा महसूस करते हैं। श्री सिन्हा ने पहले भी कई लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़े हैं लेकिन वह कभी जीत नहीं पाए। अगर वह उम्मीद के मुताबिक जीत जाते हैं, तो एक निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में यह उनका पहला कार्यकाल होगा।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल से राज्यसभा उम्मीदवार तय करते समय कम से कम नौ नामों पर चर्चा की गई थी। इस दौरान राज्य नेतृत्व, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्रीय नेतृत्व की राय को ध्यान में रखा गया। भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने श्री सिन्हा के नाम पर मुहर लगाने से पहले कई दौर की बैठकें कीं। इस बार केंद्रीय नेतृत्व ने उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल इकाई की राय को प्राथमिकता देने का निर्णय किया।

यह कदम पार्टी की पिछली पसंद अनंत महाराज (नगेन्द्र राय) को लेकर हुई असहजता के बाद उठाया गया है, जिनके बयानों-जैसे कूचबिहार के लिए अलग राज्य की मांग और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंच पर दिखने-से पार्टी नेतृत्व को कई बार शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी।

श्री सिन्हा ने भरोसा जताया कि भाजपा राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव जीतेगी। उन्होंने कहा कि उन्हें संसद में बंगाल के मुद्दे उठाने के लिए ज्यादा समय शायद न मिले क्योंकि जल्द ही राज्य की "अलोकतांत्रिक सरकार" की जगह एक "नई सरकार" ले लेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह बंगाल के अन्य पार्टी नेताओं के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कामों को जनता के सामने रखेंगे।

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