भुवनेश्वर , अप्रैल 30 -- ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गुरुवार को राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा प्रहार किया और आरोप लगाया कि वह महिलाओं के अधिकारों के बारे में सिर्फ़ ज़ुबानी बातें करती है, उनके सशक्तिकरण के लिए कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है।
ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी पर हुई बहस में हिस्सा लेते हुए श्री पटनायक ने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर झूठे आख्यान गढ़कर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि लोगों को हमेशा के लिए धोखा नहीं दिया जा सकता। ओडिशा में महिलाओं के कल्याण की असलियत भाजपा के दावों से बिल्कुल अलग है। विधायिका में महिला आरक्षण और परिसीमन ने जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का ज़िक्र करते हुए, श्री पटनायक ने कहा कि दो अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा हो रही है। पहला नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 जिसे संसद में सर्वसम्मति से पारित किया गया था और दूसरा परिसीमन की प्रक्रिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से ही पारित हो चुके महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ना एक 'गुपचुप चाल' है, जिसका मकसद इसके प्रभावों पर पर्याप्त चर्चा किए बिना परिसीमन को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि बीजू जनता दल (बीजद) ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक का पूरी तरह समर्थन किया था और अब भी इसको तत्काल लागू करने की मांग कर रही है।
महिलाओं के सशक्तिकरण में ओडिशा की विरासत पर प्रकाश डालते हुए श्री पटनायक ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के नेतृत्व में यह राज्य देश के उन पहले राज्यों में से एक था, जिसने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था। उन्होंने कहा कि 2011 में उनकी सरकार ने इस आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया, जिससे जमीनी स्तर पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी बढ़ गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजद ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में महिला उम्मीदवारों को अपने 33 प्रतिशत टिकट दिये थे। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वह भी इसी तरह की प्रतिबद्धता दिखाये। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे अपने हालिया पत्र और ओडिशा के 21 सांसदों से की गयी अपनी अपील का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें महिलाओं के अधिकारों और ओडिशा के राजनीतिक हितों पर बीजद का रुख स्पष्ट रूप से बताया गया है।
भाजपा के कथित 'गलत सूचना अभियान' पर चिंता व्यक्त करते हुए श्री पटनायक ने कहा कि यह मुद्दा ओडिशा की विशिष्ट पहचान और राजनीतिक आवाज से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया से ओडिशा के लोगों, विशेष रूप से आने वाली पीढ़ियों के राजनीतिक अधिकार कम हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इतिहास उन नेताओं को कभी माफ नहीं करेगा जिन्होंने राज्य के हितों की रक्षा किये बिना ऐसे कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब तक वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे, तब तक किसी को भी ओडिशा को उसके हक से वंचित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने भाजपा विधायकों पर महिलाओं के मुद्दों पर 'मगरमच्छ के आंसू' बहाने का आरोप लगाया और कहा कि उनके कल्याण के प्रति उनमें कोई प्रतिबद्धता दिखाई नहीं देती है।
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