कोलकाता , मई 09 -- तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को राज्य के पुलिस प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 'देश बचाओ गणतांत्रिक मंच' की ओर से आयोजित रवींद्र जयंती कार्यक्रमों को मनाने की अनुमति नहीं दी गयी।

सुश्री बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास के निकट आयोजित एक छोटे कार्यक्रम में आरोप लगाया कि "देश बचाओ लोकतांत्रिक मंच" द्वारा आयोजित रवींद्र जयंती कार्यक्रमों को पुलिस ने अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि कालीघाट फायर स्टेशन मोड़ समेत तीन स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति से इनकार कर दिया गया।

उन्होंने कहा, "हम बचपन से रवींद्र जयंती, गांधी जयंती और नेताजी जयंती मनाते आये हैं। अब ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी अनुमति नहीं दी जा रही है।"सुश्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के लिए सजावट और मंच उपलब्ध कराने वालों को भी सहयोग नहीं करने की चेतावनी दी गयी थी। उन्होंने कहा, "आज हमें खुद दो छोटे मंच खरीदने पड़े, क्योंकि साज-सज्जा प्रबंधकों को मना कर दिया गया था।"पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा समर्थकों पर तृणमूल कार्यकर्ताओं और समर्थकों के खिलाफ "अराजकता और आतंक" फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य के कई हिस्सों में हिंसा और धमकी का माहौल है जबकि पुलिस "मूक दर्शक" बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि उनके घर में काम करने वाली एक अनुसूचित जाति की महिला कर्मचारी की 92 वर्षीय मां को भी कथित भाजपा समर्थकों के डर से दूसरी जगह भेजना पड़ा।

सुश्री बनर्जी ने 2011 में वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से हटाने के बाद की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने कभी प्रतिशोध की राजनीति नहीं की। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को सुरक्षा उपलब्ध कराई थी और अपना बुलेटप्रूफ वाहन भी भेजा था।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद तृणमूल नेताओं की सुरक्षा भी वापस ले ली गयी है।

उन्होंने कहा, "जिस दिन से वे जीते हैं, हमारी सुरक्षा हटा ली गयी है।"सुश्री बनर्जी ने पार्टी को चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ रही अंदरूनी असहमति के संकेतों को कम करके दिखाने की कोशिश की।

सुश्री बनर्जी ने कहा, "जो कोई भी पार्टी छोड़ना चाहता है, वह ऐसा कर सकता है। जो लोग पार्टी में शामिल होना चाहते हैं, उनका स्वागत है।" उन्होंने संगठन के भीतर मौजूद कुछ आलोचकों पर परोक्ष रूप से निशाना साधा, जिन्हें उन्होंने राजनीतिक नेताओं के बजाय "व्यापारिक मानसिकता वाले लोग" करार दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली और आई-पैक पर बढ़ती निर्भरता को लेकर वरिष्ठ नेताओं रवींद्रनाथ घोष और कृष्णेंदु नारायण चौधरी समेत कई नेता सवाल उठा चुके हैं।

पार्टी नेतृत्व के लिए असहज स्थिति तब और बढ़ गयी जब वरिष्ठ तृणमूल नेता फिरहाद हकीम की पुत्री प्रियदर्शिनी हकीम ने सोशल मीडिया पर पार्टी नेतृत्व की आलोचना की। उन्होंने महाभारत का संदर्भ देते हुए सुश्री बनर्जी की तुलना "धृतराष्ट्र" और अभिषेक बनर्जी की तुलना "दुर्योधन" से की और आरोप लगाया कि "अंधभक्ति" तथा वंशवादी राजनीति ने संगठन को कमजोर किया है।

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