नयी दिल्ली , फरवरी 26 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एआई सम्मेलन में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को सोची समझी साजिश बताते हुये इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि धूमिल होने का आरोप लगाया है।

पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने बुधवार को यहां भाजपा मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस पर आरोप लगाते हुये दावा किया कि सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश और स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, जिनमें कुछ लोगों को विश्व एआई सम्मेलन के खिलाफ ट्वीट या रील बनाने के बदले 25 हजार से 1.5 लाख रुपये तक देने की बात सामने आयी है। श्री पात्रा ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर देश के हितों से कई बार समझौता करने का भी आरोप लगाया।

डॉ. पात्रा ने कहा कि एआई सम्मेलन में विरोध में ट्वीट करने और रील बनाने के दावों को कुछ मीडिया चैनलों ने भी प्रसारित किया है। उनके अनुसार, यह सब भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की पूर्व-नियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कंप्रोमाइज्ड (समझौता) शब्द का इस्तेमाल करने से पहले कांग्रेस को अपने इतिहास की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने नेहरू की नीतियों पर सवाल उठाते हुए विदेश नीति, सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय निर्णयों को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

डॉ. पात्रा ने नेहरू द्वारा 1954 के पंचशील समझौता का उल्लेख करते हुए कहा कि तिब्बत और अक्साई चीन से जुड़े मुद्दों पर उस दौर के फैसलों के दीर्घकालिक प्रभाव आज भी देश भुगत रहा है। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध, बेरूबारी समझौते और कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के फैसले पर भी सवाल खड़े करते हुये कहा कि 1950 और 1955 में भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के प्रस्ताव मिले थे, लेकिन श्री नेहरू ने ठुकरा दिया। उन्होंने ग्वादर बंदरगाह से जुड़े प्रस्ताव का जिक्र करते हुए भी उस समय की नीतियों की आलोचना की।

डॉ. पात्रा ने इस दौरान कांग्रेस से सात सवाल पूछकर तिब्बत, बेरूबारी, कश्मीर, कच्छ के रण और अन्य सीमाई मुद्दों पर निर्णयों को लेकर कांग्रेस स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि देश को इन ऐतिहासिक फैसलों की सच्चाई जानने का अधिकार है।

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