त्रिशूर , जुलाई 22 -- केरल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के त्रिशूर जिला कार्यालय के पूर्व सचिव पी अक्षय ने दावा किया है कि चुनाव संबंधी उद्देश्यों के लिए 17 बोरियों में भरकर 25 करोड़ रुपये की अघोषित नगदी कार्यालय में लायायी गयी था, जिसे बाद में वरिष्ठ नेताओं ने हड़प लिया।
नवंबर 2025 से 14 जुलाई 2026 तक कार्यालय सचिव रहे श्री अक्षय ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह राशि तमिलनाडु के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली कार से जिला कार्यालय पहुंचायी गयी थी।
पार्टी के भीतर से ही लगे इस गंभीर आरोप से प्रदेश नेतृत्व भारी संकट में घिर गया है। उन्होंने यह कहकर पार्टी की परेशानी ज्यादा बढ़ा दी है कि आने वाले दिनों में इस संबंध में वह और सबूत उजागर करेंगे।
श्री अक्षय के अनुसार, यह 25 करोड़ रुपये भाजपा जिला समिति कार्यालय की दूसरी मंजिल पर और गांधीनगर स्थित एक मकान में सुरक्षित रखे गये थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे को 17 बोरियों में भरकर कार्यालय लाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेताओं के निर्देश पर कैश पहुंचने के समय कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे जानबूझकर बंद कर दिये गये थे। उन्होंने दावा किया कि सबूत मिटाने की कोशिश के तहत पुराने डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) हटाकर उसकी जगह नया डीवीआर लगा दिया गया था।
श्री अक्षय ने आरोप लगाया कि चुनाव उद्देश्यों के लिए लायी गयी अघोषित नकदी की इस बड़ी रकम को चुनाव प्रचार या अन्य पार्टी जरूरतों के लिए नहीं बांटा गया। इसके बजाय वरिष्ठ नेताओं ने आपस में पैसे बांट लिए और अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए इसका गबन किया।
पूर्व कार्यालय सचिव ने कहा कि उन्होंने इस अघोषित नकदी लेनदेन और पार्टी नेताओं की वित्तीय धोखाधड़ी के संबंध में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष को भी विस्तृत शिकायतें भेजी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों की जांच करने के बजाय पार्टी नेतृत्व ने शिकायत और असहमति व्यक्त करने वाले कई निर्दोष कार्यकर्ताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
उन्होंने दावा किया कि संगठन सचिव केपी सुरेश, मुरली कोलंगट और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष केके अनीश कुमार को इस नकदी लेनदेन की पूरी जानकारी थी।
पूर्व कार्यालय सचिव ने आने वाले दिनों में अघोषित कैश के लेनदेन और गबन से जुड़े और सबूतों को उजागर करने का भी एलान किया है।
पचीस करोड़ रुपये की अघोषित नगदी का यह नया आरोप केरल में ऐसे समय पर आया है, जब लगभग डेढ़ वर्ष पहले कोडाकारा हवाला कांड ने राज्य को हिलाकर रख दिया था और भाजपा को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया था। इसके बाद अब इस नये मामले ने राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
इस ताजा विवाद को कोडाकारा हवाला कांड की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है। उस मामले में 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक तीन दिन पहले तीन अप्रैल की तड़के राष्ट्रीय राजमार्ग पर जा रही एक कार पर आपराधिक गिरोह ने हमला कर 3.5 करोड़ रुपये लूट लिये थे। पुलिस जांच में सामने आया था कि यह पैसा भाजपा उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार के लिए लाया गया था। इसके बाद चुनाव कोष के गबन को लेकर शुरू हुए विवाद ने भाजपा के भीतर अंदरूनी कलह को और बढ़ा दिया।
इस बीच भाजपा के पूर्व पदाधिकारी तिरूर सतीश ने भी पार्टी नेताओं की संपत्तियों और बेनामी सौदों की जांच की मांग की है।
श्री सतीश ने सवाल उठाया कि जो लोग कभी किसी नियमित रोजगार में शामिल नहीं रहे और जिनके पास उनके मुताबिक एक रुपया तक नहीं था, वे अचानक इतने अमीर कैसे हो गये? उन्होंने पूछा, "उनकी कमाई का जरिया क्या है?" और मांग की कि पार्टी को ऐसे मामलों की निष्पक्ष व व्यापक जांच कराने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्श्रीहोंने सतीश ने आरोप लगाया कि भाजपा हर चुनाव में सबसे ज्यादा पैसा खर्च करने वाला राजनीतिक दल है। उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि चुनाव के दौरान बहाये गये पैसे के अनुपात में पार्टी को न तो वोट मिलते हैं और न ही सीटें।
उन्होंने दावा किया कि इसकी मुख्य वजह यह है कि पार्टी दफ्तरों तक पहुंचने वाला पैसा जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक वितरित ही नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बजाय नेता उस पैसे का इस्तेमाल निजी फायदों के लिए कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व की भी आलोचना की कि पिछले चुनाव के दौरान पार्टी के जिला कार्यालय से चुनावी फंड का गबन करने वाले नेताओं के खिलाफ उनकी पुरानी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया था।
श्री सतीश ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद नेतृत्व ने एक बार फिर उन्हीं नेताओं को चुनावी फंड की जिम्मेदारी सौंप दी, जिससे इस तरह के भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला।
इस बीच प्रदेश भाजपा के सूत्रों ने संकेत दिया है कि फंड गबन का आरोप अनावश्यक विवाद है, जिसे राज्य के कुछ नेताओं को निशाना बनाने के लिए जानबूझकर गढ़ा जा रहा है।
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