जयपुर , अप्रैल 06 -- राजस्थान प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भाजपा की स्थापना से लेकर आज तक की संघर्षपूर्ण यात्रा को रेखांकित करते हुए सोमवार को कहा कि अनेक बलिदानों, त्याग और तपस्या के बाद पार्टी आज एक "वटवृक्ष" के रूप में खड़ी है।

श्री राठौड़ आज भाजपा के 47वें स्थापना दिवस के अवसर भाजपा प्रदेश कार्यालय मेंआयोजित संगोष्ठी में यह बात कही। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय के योगदान को याद करते हुए संगठन की वैचारिक नींव को बलिदान और राष्ट्रवाद पर आधारित बताया। उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर जोर दिया।

उन्होंने संगठन की उपलब्धियों, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती लोकप्रियता की प्रशंसा की। श्री राठौड़ ने कहा कि आज विपक्ष के नेता भी भाजपा के नेतृत्व की सराहना करते हैं, फिर चाहे वो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर हो, आनंद शर्मा हो। वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जहां दुनिया युद्ध और संकट से जूझ रही है, वहीं भारत मजबूती से खड़ा है और पड़ोसी देशों की मदद भी कर रहा है। आज विश्व में नेतृत्व देने की स्थिति में हमारा संगठन आया है।

उन्होंने कहा कि भाजपा एक विचार लेकर चला संगठन है। एकात्म मानववाद, सर्वे भवंतु सुखिनः और वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश लेकर चल रहा है। आज परिवारवादी पार्टियां लुप्त होने जा रही है।

इस अवसर पर सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने भाजपा की वैचारिक पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक विकास को विस्तार से बताते हुए कहा कि भारतीय राजनीति को समझने के लिए श्यामाप्रसाद मुखर्जी और भीमराव अंबेडकर के पत्रों का अध्ययन करना आवश्यक है, जो उन्होंने जवाहरलाल नेहरू को इस्तीफे के दौरान लिखे थे। उन्होंने इन पत्रों को ऐतिहासिक धरोहर बताया और कहा कि जनसंघ की स्थापना भी त्याग और बलिदान की नींव पर हुई थी।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, सांसद मंजू शर्मा, विधायक गोपाल शर्मा, बालमुकुंदाचार्य सहित कई पार्टी विधायक, भाजपा महामंत्री श्रवण सिंह बगडी एवं पार्टी के अन्य लोग मौजूद थे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित