रांची , अगस्त 11 -- झारखंड के प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि भाजपा की मंशा पूरी नहीं होने पर आदित्य साहू की बिलबिलाहट स्वाभाविक है।
श्री शांति ने आज कहा कि छात्रों के आंदोलन पर भाजपा ने समर्थन के नाम पर सिर्फ मुंह दिखाई की,समर्थन के नाम पर भाजपा ने छात्रों को छला।
उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दे पर सड़क और सदन दोनों जगह से भाजपा के नेता गायब रहे। जब छात्र अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव कर रहे थे उसी समय बाबूलाल मरांडी आदित्य साहू सहित भाजपा के विधायकों ने अघोषित कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया और अपने दल के असामाजिक तत्वों को छात्रों के आंदोलन को बदनाम करने के लिए भेजा। इस कलंक से बचने के लिए आनन-फानन में झारखंड बंद का भाजपा द्वारा आहृवाहन किया गया वह भी एक थर्ड ग्रेड फिल्म का सीन बनकर रह गया।
श्री शांति ने कहा कि जनता और छात्रों ने अपनी आवाज सदन में बुलंद करने के लिए भाजपा के विधायकों को भेजा था लेकिन विधानसभा घेराव के दिन भाजपा नेताओं का सदन से गायब रहना स्पष्ट करता है कि छात्रों के मामले में भारतीय जनता पार्टी सिर्फ अपनी राजनीतिक दुकानदारी चलाने की कोशिश कर रही है। जेपीएससी मामले की जांच सीबीआई से करने के बहाने भाजपा राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल पैदा करना चाहती है, पूरे देश में हजारों मामलों की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है लेकिन अधिकांश मामलों मे अभियुक्त अभी तक अपराधी साबित नहीं हो पाये हैं।
श्री शांति ने कहा इस देश में गालियों की एक लंबी श्रृंखला प्रधानमंत्री ने तैयार करके विरासत में छात्रों और युवाओं को दिया है इसलिए नैतिक रूप से पतित हो चुके भाजपा के नेताओं को संस्कारिक बातें नहीं करनी चाहिए। संसद से 100 कदम की दूरी पर बैठे छात्र-छात्राओं से मिलने का वक्त प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को नहीं था और आरोप राहुल गांधी पर लगाते हैं। छात्रों पर पैलेट गन और एक-47 चलाने वाले लोग झारखंड की कार्रवाई पर उंगलियां ना उठाएं।
कांग्रेस यह मानती है कि लाठी चार्ज और हिंसा समस्या का समाधान नहीं हो सकता बल्कि संवाद ही समाधान का एकमात्र रास्ता है झारखंड में संवाद से ही समाधान होगा। भाजपा के हिस्से आएगी "खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे।" आंदोलनकारी छात्रों ने साफ और स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके आंदोलन को खराब करने के लिए आसामाजिक तत्वों ने घुसकर प्रशासन पर हमले किये।
आदित्य साहू में अगर थोड़ी भी नैतिकता बची हो तो आंदोलन को खराब करने की कोशिश करने के लिए छात्रों से माफी मांग कर अपने बड़प्पन का परिचय दें। झारखंड के छात्र भाजपा के दिखाये सांप्रदायिक रास्ते पर नहीं बल्कि अपने उज्जवल भविष्य के रास्ते पर कदम बढ़ाएंगे।
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