रांची , जून 07 -- झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनावी समीकरणों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए अपना उम्मीदवार नहीं उतारने का निर्णय लिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा अब निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का समर्थन करेगी। भाजपा सूत्रों ने आज बताया कि पार्टी के लगभग एक दर्जन विधायकों के साथ-साथ जदयू, लोजपा और आजसू के विधायकों को भी नाथवानी के प्रस्तावक बनने का निर्देश दिया गया है। नाथवानी भाजपा के समर्थन से 8 जून को अपना नामांकन दाखिल करेंगे।
परिमल नाथवानी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से शनिवार को मुलाकात के बाद दिल्ली रवाना हो गए थे। राजनीतिक सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया था कि झामुमो उनके नामांकन में प्रस्तावक की भूमिका नहीं निभाएगी। इसके बाद नाथवानी ने भाजपा का समर्थन हासिल करने की दिशा में तेजी से प्रयास किया और उसमें सफल भी रहे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झामुमो कांग्रेस के खिलाफ प्रत्यक्ष विरोधी छवि नहीं बनाना चाहता था, इसलिए उसने नाथवानी के प्रस्तावक बनने से दूरी बनाए रखी।
श्री नाथवानी के निर्दलीय उम्मीदवार बनने और भाजपा का समर्थन मिलने के बाद उनकी जीत की संभावनाएं काफी मजबूत मानी जा रही हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के सामने अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने की चुनौती और कठिन हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले से कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह करते रहे हैं कि कांग्रेस अपना उम्मीदवार न उतारे और झामुमो को दोनों सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने का अवसर दे। हालांकि इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि भाजपा का समर्थन मिलने के बाद परिमल नाथवानी को जीत के लिए केवल कुछ अतिरिक्त मतों की आवश्यकता होगी, जिसकी व्यवस्था करना उनके लिए कठिन नहीं माना जा रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस को छोड़ अधिकांश दलों के विधायकों के बीच नाथवानी की उम्मीदवारी को लेकर सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है।
वहीं कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने 16 विधायकों को एकजुट बनाए रखना है। राज्यसभा चुनाव के लिए 18 जून को होने वाले मतदान के बाद यह स्पष्ट होगा कि कांग्रेस अपने सभी विधायकों का समर्थन अपने प्रत्याशी प्रणव झा के पक्ष में सुनिश्चित कर पाई या नहीं। यदि पार्टी के भीतर किसी प्रकार की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग होती है तो इससे कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति कमजोर पड़ सकती है। इसका असर भविष्य में राज्य सरकार और गठबंधन की आंतरिक राजनीति पर भी पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राज्यसभा चुनाव के इस रोचक मुकाबले ने झारखंड की राजनीति को नई दिशा दे दी है और आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
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