नागपुर , अक्टूबर 07 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बुधवार को लोगों से देश की सभ्यतागत परंपराओं से जुड़े रहने तथा समाज एवं मानवता के कल्याण के लिए किये जा रहे प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि समृद्ध और सामंजस्यपूर्ण भविष्य के निर्माण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी है।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के अवसर पर नागपुर के पास देवलापुर स्थित गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र में विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद श्री भागवत ने कहा कि देश के पारंपरिक मूल्य सामाजिक स्थिरता, मानव कल्याण और वैश्विक कल्याण की दिशा दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन की रक्षा, समाज और आस्था की सुरक्षा तथा दुनिया के बेहतर भविष्य में योगदान देने के लिए भारतीयों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप जीवन जीना और इन्हीं मूल्यों के आधार पर सफलता हासिल करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सभी के लिए सार्थक और संतोषजनक जीवन सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए।
सामाजिक कार्यों में आम लोगों की अधिक भागीदारी की जरूरत पर जोर देते हुए श्री भागवत ने कहा कि बहुत से लोग रचनात्मक गतिविधियों में लगे हुए हैं, लेकिन समाज के आकार और उसकी जरूरतों को देखते हुए उनकी संख्या अभी भी पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि लोग उत्साह के साथ त्योहार और सार्वजनिक कार्यक्रम मनाते हैं, लेकिन अक्सर सामाजिक सेवा की जिम्मेदारी दूसरों पर छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ता है, जब लोग स्वेच्छा से ऐसे कर्तव्यों को निभाते हैं, जो सामूहिक हित में योगदान देते हैं।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज की उपलब्धियां कभी किसी एक व्यक्ति के प्रयास का परिणाम नहीं होतीं, बल्कि एक साथ काम करने वाले अनगिनत लोगों के सामूहिक योगदान को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि महान व्यक्तित्वों को या तो उनके द्वारा शुरू किये गये कार्यों को आगे बढ़ाकर याद किया जा सकता है या केवल उनके योगदान को याद करके। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग यह जानते हैं कि क्या किया जाना चाहिए, लेकिन फिर भी पहल करने के लिए किसी और का इंतजार करते रहते हैं।
त्याग और दृढ़ता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अपने निजी जीवन में समर्पण और धैर्य दिखाने वाले लोग अक्सर दूसरों को कठिन कार्य करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची प्रतिबद्धता का अंततः सार्थक परिणाम मिलता है।
आरएसएस के पूर्व विचारक मोरोपंत पिंगले और दिवंगत सिंघल का जिक्र करते हुए श्री भागवत ने कहा कि दोनों ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया और आज भी पूरे देश में सम्मान और प्रशंसा के पात्र हैं।
उन्होंने कहा कि जब श्री सिंघल और श्री पिंगले ने निस्वार्थ सेवा का रास्ता चुना था, तब वे व्यापक रूप से परिचित नहीं थे, लेकिन उनके मन में यह दृढ़ विश्वास था कि उनका जीवन केवल उनका अपना नहीं, बल्कि राष्ट्र का भी है।
उन्होंने कहा कि इस संकल्प से प्रेरित होकर उन्होंने जीवनभर समाज के लिए अथक काम किया। श्री भागवत ने लोगों से व्यक्तिगत लाभ या सम्मान की चिंता किए बिना अपनी क्षमताओं और संसाधनों को रचनात्मक कार्यों के लिए समर्पित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्य हमेशा समाज और राष्ट्र के हितों से निर्देशित होना चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित