भागलपुर, अक्टूबर 06 -- बिहार में अंग प्रदेश (भागलपुर) की समृद्ध लोक परंपरा और प्राचीन लोक चित्रकला 'मंजूषा कला' के संरक्षण, संवर्धन एवं कलाकारों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंगलवार को यहां पांचवीं 'मंजूषा हटिया सह लोक कला प्रदर्शनी' का आयोजन किया गया।कला एवं संस्कृति विभाग एवं भागलपुर संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान मे मंगलवार को स्थानीय संग्रहालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी श्रीमती अलंकृता पांडेय, प्रख्यात शिक्षाविद रजनीकांत मिश्रा, मंजूषा कला से जुड़े मनोज पंडित एवं उलूपी झा ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर किया।

मंजूषा हटिया में स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार की गई विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों एवं हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की गई। इस दौरान बीस हजार रुपये से अधिक मूल्य की कलाकृतियों एवं हस्तनिर्मित सामग्री की बिक्री हुई। इस बार मंजूषा कला के पारंपरिक स्वरूप के साथ-साथ कलाकारों द्वारा किए जा रहे नए प्रयोग विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। मंजूषा टी-शर्ट, स्क्रीन प्रिंटिंग से तैयार कपड़े, जूट से बने क्राफ्ट वर्क, साड़ियां, दुपट्टे, रुमाल, बैग, मंजूषा शो-पीस, सजावटी पंखे सहित अनेक उपयोगी एवं सजावटी वस्तुओं को लोगों ने खूब पसंद किया और खरीददारी भी की।

इस अवसर पर जिलाधिकारी अलंकृता पाण्डेय ने मंजूषा हटिया के पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय कला एवं कलाकारों को सीधे बाजार से जोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण और सराहनीय नवाचार है। उन्होंने कहा कि कला केवल प्रदर्शनी तक सीमित न रहे, बल्कि कलाकारों को उनके उत्पादों का उचित बाजार और व्यापक ग्राहक वर्ग उपलब्ध हो, इस दिशा में निरंतर प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने डिजिटल मार्केट एवं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से मंजूषा कलाकारों और उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंजूषा जैसी लोककलाओं को नई पीढ़ी से जोड़ते हुए आधुनिक माध्यमों और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप नए प्रयोग किए जाने चाहिए, जिससे कलाकारों को कला के माध्यम से स्थायी आर्थिक अवसर प्राप्त हो सकें।

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने कहा कि मंजूषा हटिया का आयोजन प्रत्येक माह प्रथम रविवार को भागलपुर संग्रहालय परिसर में किया जाता है। इस बार प्रथम रविवार को जितिया पर्व होने के कारण मंजूषा हटिया का आयोजन मंगलवार को किया गया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल कलाकृतियों की बिक्री करना नहीं है, बल्कि मंजूषा कलाकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना, कलाकारों के बीच संवाद एवं अनुभवों का आदान-प्रदान बढ़ाना और स्थानीय कला को आम लोगों के जीवन से जोड़ना भी है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित