चंडीगढ़ , अगस्त 06 -- अकाली दल 'वारिस पंजाब दे' के वरिष्ठ नेता एवं मूलांपुर दाखा से विधायक मनप्रीत सिंह इयाली ने गुरुवार को पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भाखड़ाबांध की डी-सिल्टिंग में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जतायी। उन्होंने कहा कि समय रहते बांध से गाद नहीं निकाली गयी तो भविष्य में पंजाब को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ सकता है।

श्री इयाली ने कहा कि भाखड़ा बांध की परिकल्पना वर्ष 1925 में सर छोटू राम ने की थी। आजादी के बाद 1948 में इसका निर्माण शुरू हुआ और वर्ष 1963 में यह बनकर तैयार हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि 1966 के पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की धाराओं 78, 79 और 80 के लागू होने के बाद पंजाब के पानी और बिजली पर उसके अधिकार प्रभावित हुए। वर्तमान में भाखड़ा बांध का पानी हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली तक पहुंच रहा है, जबकि यहां उत्पादित बिजली का लाभ भी अन्य राज्यों को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि कई वर्षों से डी-सिल्टिंग नहीं होने के कारण बांध में भारी मात्रा में मिट्टी और पत्थर जमा हो चुके हैं, जिससे इसकी जल भंडारण क्षमता लगातार घट रही है। इसके परिणामस्वरूप बांध जल्दी भर जाता है और खतरे के स्तर तक पहुंचने पर फ्लड गेट खोलने पड़ते हैं, जिसका सबसे अधिक नुकसान पंजाब को बाढ़ के रूप में उठाना पड़ता है।

श्री इयाली ने कहा कि विशेषज्ञों ने बांध के निर्माण के समय इसके झुकाव की एक निर्धारित सीमा तय की थी, लेकिन मौजूदा स्थिति चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि बांध की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए तथा तकनीकी विशेषज्ञों की सिफारिशों को तत्काल लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने डी-सिल्टिंग के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। इसके अलावा, आईआईटी रुड़की और आईआईटी रोपड़ की रिपोर्टों में भी भाखड़ा बांध की तत्काल डी-सिल्टिंग की आवश्यकता बतायी गयी है, ताकि भविष्य में किसी संभावित बड़े खतरे से बचा जा सके।

उन्होंने मांग की कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी), केंद्र सरकार, पंजाब सरकार तथा भाखड़ा बांध से पानी और बिजली का लाभ लेने वाले सभी राज्य अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए डी-सिल्टिंग का कार्य युद्धस्तर पर शुरू करें, ताकि पंजाब और देश के लाखों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चितकी जा सके।

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