अमरोहा , अक्टूबर 09 -- उत्तर प्रदेश के अमरोहा में "किसान युवा संसद" और भाकियू संयुक्त मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मोमबत्ती जलाकर नाना पाटेकर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें असली अन्नदाता करार दिया। भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने नाना पाटेकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि खेती से लेकर 'नाम' फाउंडेशन तक वे हमेशा किसानों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। वे एक बड़े किसान होने के साथ-साथ धरातल से जुड़े असली अन्नदाता थे। बचपन में आर्थिक तंगी का सामना करने वाले नाना पाटेकर का सादा जीवन और सरल स्वभाव हर किसी के लिए प्रेरणादायी था।

उन्होने कहा कि किसान आंदोलनों और कृषि क्षेत्र की समस्याओं पर नाना पाटेकर के विचार सदैव स्पष्ट रहे। वे अक्सर कहा करते थे कि किसान के लिए पहले देश है, बाद में सब कुछ। किसानों का कर्ज माफ करना अलग बात है, लेकिन स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार फसलों का उचित मुआवजा और दाम मिलना किसानों का अधिकार है। वे अकसर इस बात पर दुख जताते थे कि लोग मॉल में जाकर जींस का मोल-भाव नहीं करते, जबकि किसान की पूरी धन-दौलत खुले आसमान के नीचे पड़ी रहती है, जिसे प्राकृतिक आपदाओं से लेकर पशु-पक्षी तक नुकसान पहुंचाते हैं।

इसके साथ ही, नरेश चौधरी ने देश की वर्तमान स्थिति और युवा वर्ग के मुद्दों पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज जेन जी और उसके बाद की पीढ़ी का गुस्सा सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। गांवों में गठित 'किसान युवा संसद' का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, बुनियादी सुविधाओं की कमी और रोजगार के घटते अवसरों को लेकर अब युवा चुप रहने के बजाय सरकारों और संस्थाओं से सीधे जवाब मांग रहे हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित