, Oct. 25 -- लखनऊ, 25 अक्टूबर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने राज्य समिति सदस्य विजय विद्रोही, आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष शर्मा समेत छह नेताओं के खिलाफ आलमबाग कोतवाली (लखनऊ) में गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन को डराने-धमकाने और दबाने की सरकारी कोशिश करार देते हुए मुकदमा तत्काल वापस लेने की मांग की है।
भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि सरकार फर्जी मुकदमों के जरिए आंदोलित आशा कार्यकर्ताओं और उनके समर्थन में खड़े संगठनों को डराने की कोशिश कर रही है। आशा कार्यकर्ता लंबे समय से स्वयं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, मानदेय बढ़ाने समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। 23 अक्टूबर को उनका प्रदेश स्तरीय धरना-प्रदर्शन ईको गार्डन में हुआ था, जिसके लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति भी ली गई थी। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
उन्होंने कहा कि धरने के दौरान उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन (सम्बद्ध ऐक्टू) के नेता विजय विद्रोही और अन्य नेताओं की अधिकारियों के साथ वार्ता हुई, लेकिन मांगों पर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। शाम को आशा कार्यकर्ताओं के वापस चले जाने के बाद यूनियन के नेता तथा आंदोलन के समर्थन में पहुंचे आइसा के नेता धरनास्थल पर मौजूद थे और वापस जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान ईको गार्डन चौकी की पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया, लेकिन आधी रात के बाद चौकी प्रभारी की ओर से उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया।
सुधाकर यादव ने बताया कि मुकदमे में विजय विद्रोही और मनीष शर्मा के अलावा भाकपा (माले) राज्य समिति सदस्य एवं यूनियन नेता कमला गौतम, देवानंद, आइसा नेता भानू तथा ऐक्टू नेता राजेश सिंह को नामजद किया गया है। इसके साथ ही करीब 200-250 आशा कार्यकर्ताओं को भी आरोपी बनाया गया है। आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम की धारा 7 समेत आधा दर्जन धाराएं लगाई गई हैं।
राज्य सचिव ने कहा कि शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने वाले आंदोलनकारियों पर आपराधिक धाराएं लगाना लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि यह मुकदमा पूरी तरह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित और आंदोलन को दबाने की कोशिश है। दमन और मुकदमों से आशा कार्यकर्ताओं का आंदोलन नहीं रुकेगा। भाकपा (माले), आइसा और ऐक्टू आंदोलनकारियों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
उन्होंने कहा, "धरना-प्रदर्शन करना कोई अपराध नहीं, बल्कि लोकतंत्र में नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। सरकार दमन का रास्ता छोड़कर आशा कार्यकर्ताओं की जायज मांगों पर बातचीत करे। दमन बढ़ेगा तो आंदोलन भी तेज होगा।"भाकपा (माले) ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और आंदोलनकारियों के हित में अपराध संख्या 0156/2026 को तत्काल वापस लेने तथा आशा कार्यकर्ताओं के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई बंद करने की मांग की है।
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