बारां , अप्रैल 14 -- केपी-3 चीता मध्य प्रदेश से निकलकर राजस्थान में बारां के जंगलों में अपने भाई केपी-2 की तलाश में भटक रहा है।

वन विभाग के सू्त्रों ने मंगलवार को बताया कि अपने भाई केपी-2 की तलाश में भटक रहा चीता केपी-3 इन दिनों बारां जिले के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय है, जिससे वन विभाग और ग्रामीणों में सतर्कता बढ़ गयी है। पिछले तीन महीनों से चीता केपी-2 बारां से निकलकर कोटा के जंगलों में घूम रहा है, वहीं अब उसका भाई चीता केपी-3 भी उसकी तलाश में दूसरी बार राजस्थान के बारां जिले में विचरण कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार केपी-3 ने बारां जिले में रामगढ़ क्षेत्र से प्रवेश किया। उसे मांगरोल, किशनगंज, जलवाड़ा होते हुए अटरू उपखंड के कवाई, मोठपुर और टिकरी गांव के आसपास सक्रिय देखा गया है। हाल ही में इसकी मौजूदगी टिकरी और हानिहेड़ा गांव के पास देखी गयी है।

बताया जा रहा है कि चीता केपी-3 ने पार्वती नदी को पार करके नाहरगढ़ रेंज से अटरू रेंज की ओर रुखकिया है। सोमवार रात इसे अनंतपुरा प्लांटेशन क्षेत्र में भी देखा गया, जिसके बाद यह आगे बढ़ गया। चीते के लगातार बदलते ठिकानों को देखते हुए राजस्थान वन विभाग और कूनो के संयुक्त दल 24 घंटे उसकी निगरानी में जुटे हैं। जीपीएस कॉलर, ड्रोन और मैदानी दलों की मदद से उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

बारां के संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) वी. माणिकराव बीड़े के अनुसार, केपी-3 पिछले करीब 22 दिनोंसे बारां जिले में विचरण कर रहा है और दूसरी बार इस क्षेत्र में सक्रिय हुआ है। उन्होंने बताया कि चीता आमतौर पर इंसानों पर हमला नहीं करता, लेकिन ऐहतियात के तौर पर ग्रामीणों को जंगलों से दूर रहने की सलाह दी गयी है।

वन विभाग ने आसपास के गांवों में मुनादी करवाकर सतर्कता बढ़ा दी है। साथ ही यह आशंका जताई जा रहीहै कि चीता केपी-3 आगे बढ़ते हुए शेरगढ़ अभयारण्य की ओर रुख कर सकता है। माना जाता है कि चीतों की आवाजाही जहां वन्यजीव संरक्षण की सफलता का संकेत है, वहीं मानव-वन्यजीव संतुलन बनाये रखना अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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